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किसानों ने आंदोलन की नई जमीन तैयार कर दी

June 11, 2021 admin 0
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किसान आंदोलन के छह महीने बाद जब आप सिंघु या टिकरी जाएंगे तो देखेंगे कि दिल्ली से खुलने वाले हाइ-वे कायदे से गांव बन गए हैं। हजारों ट्रॉलियों और झोपडिय़ों के बीच टहलते किसान जब्र का जवाब अपने सब्र से दे रहे हैं। यह आंदोलन पसरकर एक विश्वविद्यालय हो गया है, जिसमें कई लाख रहवासी हैं।

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शव वाहिनी गंगा

May 17, 2021 admin 0
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(हिंदी ) शव वाहिनी गंगा – पारुल खख्खर एक आवाज में मुर्दे बोलें सब कुछ ‘चंगा चंगा’, राजा, तुम्हारे रामराज्य में शव वाहिनी गंगा,   […]

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पुरुष बर्बरता की हार

March 29, 2021 admin 0
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अंजलि देशपांडे प्रिया रमानी जीत गईं, इसी बात को  तकनीकी रूप से सही शब्दों में कहा जाए तो कहना पड़ेगा की वह बरी हो गईं। […]

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आयुर्वेद और सर्जरी: कीमत जनता चुकाएगी

January 19, 2021 admin 0
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रामप्रकाश अनंत बीस नवंबर को केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसके अनुसार, आयुर्वेद में पोस्ट ग्रेजुएट 39 जनरल सर्जरी और […]

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कॉरपोरेट और हिंदुत्व के गठजोड़ का सबसे बड़ी चुनौती

January 15, 2021 admin 0
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कॉरपोरेट और हिंदुत्व की राजनीति के इस गठजोड़ को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती किसानों के आंदोलन द्वारा मिल रही है, जिसे धीरे-धीरे देश के अन्य मेहनतकश तबकों और जनपक्षधर बुद्धिजीवियों का समर्थन मिल रहा है और यह समर्थन निरंतर बढ़ता जा रहा है। 1991 के बाद के भारत के इतिहास का यह सबसे बड़ा जनांदोलन है, जिसके निशाने पर सीधे कॉरपोरेट घराने और उनके राजनीतिक नुमाइंदे हैं।