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वोट की राजनीतिः आखिर जनता का पैमाना क्या होता है?

November 18, 2020 admin 0
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गाय पट्टी में बिहार वामपंथी, सोशलिस्ट और सामाजिक न्याय के आंदोलन का गढ़ रहा है। यह ऐसा प्रदेश रहा है, जहां 1970 के दशक में ही सोशलिस्ट पार्टी की सरकारें बनीं। भले ही ये सरकारें ज्यादा दिन नहीं चल पाई हों। वामपंथी आंदोलन, सोशलिस्ट आंदोलन और सामाजिक न्याय आंदोलन, तीनों का आधार सामाजिक तौर पर पिछड़े एवं दलित और आर्थिक तौर पर भूमिहीन एवं गरीब-सीमांत किसान रहे हैं, भले ही नेतृत्व में ऊंची जातियां भी रही हों। जहां सोशलिस्ट आंदोलन का मुख्य आधार पिछड़ा वर्ग था, वहीं वामपंथी आंदोलन का व्यापक आधार दलितों में भी था।

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‘हेट स्पीच’ का दुःस्वप्न

October 19, 2020 admin 0
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पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है जो समाज से जुड़ा है और जो अपने लिखे हुए, प्रकाशन और प्रसारण के लिए समाज के प्रति जवाबदेह है। अगर एक भी शब्द या दृश्य गलत या झूठा है या सनसनी फैलाने और किसी को चोर रास्ते से बढ़ावा देने या बचाने के लिए लिखा गया है तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसीलिए मीडिया के नियमन की आवश्यकता पड़ती है। भारत में मीडिया के नियमन की कोई एकीकृत प्रणाली और कानून व्यवस्था नहीं है।

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विपदा ने सिखायी नरमी

October 11, 2020 admin 0
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  हरीश खरे   नरेंद्र मोदी के स्वाधीनता दिवस के भाषण को उनकी ही कसौटी पर कसें तो पाते हैं कि इस बार उन्हें इसमें […]

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कोरोना वायरसः बीमारी का सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ

April 14, 2020 admin 0
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दुनिया के सामने स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना वायरस से पहले की दुनिया, कोरोना वायरस के बाद की दुनिया में , बहुत फर्क आ चुका है। कोरोना का डर दिखा कर जिस तरह से पूरी दुनिया में तानाशाही की रिहर्सल हो रही है यह लंबे समय तक इस तरह नहीं टिक पाएगी। कोरोना के नाम पर साम्राज्यवाद अपना आर्थिक संकट टाल नहीं पाएगा।