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चर्चा में

संस्मरण : असहमति के सहयात्री

राजेंद्र यादव को याद करते हुए ऐसा जीवंत व्यक्ति हिंदी में शायद ही दूसरा कोई हो। राजेंद्र जी अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो पिछले दो दशकों से हिंदी की प्राणहीन,...

घटनाक्रम – दिसंबर 2013

निधन - प्रसिद्ध कनाडाई डाक्यूमेंटरी फिल्मकार पीटर विन्टॉनिक का कैंसर से निधन। उनकी सर्वाधिक चर्चित फिल्मों में मैन्युफैक्चरिंग कांसेंट: नोम चोम्स्की एंड द मीडिया तथा सिनेमा वेराइटे: डिफाइनिंग द...

साहित्य – पटना : कविता का रागदरबारी

अजय सिंह सन् 1970 के दशक के हमारे दोस्त - वामपंथी रुझान के हिंदी कवि - आलोकधन्वा और मंगलेश डबराल उन 43 कवियों में शामिल हैं, जो बिहार सरकार...

शिक्षा :बदलेंगे चित्र तो बदलेगा मानस

गायत्री आर्य मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूली किताबों से ऐसे सभी चित्र बदलने को कहा है जिसमें लड़कियों को लड़कों के मुकाबले कमतर दिखाया जा रहा हो। उत्तराखंड...

संपादकीय : रास लीला, राम लीला और ‘न्याय लीला’

उपरोक्त शब्दों में तीसरा शब्द जो अर्थ प्रेषित करता है वह रास लीला और राम लीला से बिल्कुल भिन्न है। 'न्याय लीला’ कहते ही जो बोध होता है वह...

पत्र : अधिरचना सत्तासीन राजनीति से अनुकूलित होगी ही

'सार्वजनिक साहित्यिक संस्थाओं का राजनैतिक रूपांतरण' (समयांतर : 11 अगस्त, 2012) शीर्षक से सर्वश्री राजेश जोशी, कुमार अम्बुज व नीलेश रघुवंशी का दुख कोई अप्रत्याशित नहीं है। बल्कि मुझे...

संपादकीय : क्या इंटरनेट एक लोकतांत्रिक माध्यम के रूप में बच पाएगा?

इंटरनेट बीसवीं सदी की ऐसी महत्त्वपूर्ण देन के रूप में उभरा है जिसे पश्चिमी दुनिया लोकतंत्र के चरम के रूप में प्रस्तुत करती है। यह गलत भी नहीं है।...

पाठयक्रम का व्यापार

अंजनी कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय, लॉ फैकल्टी या डी स्कूल के फोटोकापी करने वाली दुकानों के बाहर एक स्टीकर चिपका दिया गया है: पूरी किताब फोटोकापी करने का...

दलित विमर्श : गंदगी की जातिगत व्यवस्था

भाषा सिंह सफाई का नरक: के.एस. तूफान, लता साहित्य सदन, पृष्ठ-202, मूल्य: 395 रुपये आजादी के छह दशक से ज्यादा बीतने के बाद भी देश भर में सफाई का नरक मौजूद...

मराठवाड़ा : सत्ता और सूखे के बीच लहलहाता गन्ना

अभिषेक श्रीवास्तव महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सरकार ने आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा भले मार्च में की, लेकिन भूलना नहीं चाहिए कि पिछले साल अगस्त में ही 400 गांवों...

अमरीकी प्रतिसंस्कृति के चौराहे पर खड़ा संगीतकार

सीमा सिरोही वुडस्टॉक का आयोजन अगर साठ के दशक के अमेरिका में मुख्यधारा और हिप्पी संस्कृति का एक रहस्यमय और जादुई समागम था, तो पंडित रवि शंकर अपनी...

संपादकीय : प्रशासन को अंग्रेजी क्यों चाहिए?

दिल्ली उच्च न्यायालय में अगस्त के मध्य में एक जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। याचिका में कहा गया है कि संघीय लोकसेवा आयोग द्वारा सिविल सेवाओं की परीक्षा...

घटनाक्रम : फरवरी 2013

निधन · वरिष्ठ हिंदी कवि हरिनारायण व्यास का पुणे में निधन वह 89 वर्ष के थे। वह दूसरा सप्तक के कवि थे नियुक्त · वेद प्रकाश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के...

सीमित दायरे में स्त्री-प्रश्न

प्रदीप पंत अद्यतन सच : वीरेंद्र सक्सेना, भावना प्रकाशन,पृ. सं.: 448, मूल्य: 600 रुपए ISBN 978-81-7667-256 - 6 पिछले कुछ वर्षों से स्त्री-अस्मिता के प्रश्न हिंदी कथा-साहित्य के केंद्र में हैं। यह...

मंटो-शताब्दी: …बड़ा अफसाना निगार

सआदत हसन मंटो यदि जीवित होते तो इस साल सौ के हो जाते, उस हिंदुस्तान से 35 साल ज्यादा बुजुर्ग जिसे वह शिद्दत से प्यार करते थे और जिसे...

मीडिया

अनियोजित नहीं है आग्रह पूर्वाग्रह

मीडिया के समाजशास्त्र और राजनीति पर जब बात होती है तो विश्लेषण का नजरिया तीन स्पष्ट भागों में बंट जाता है। पहला नजरिया मीडिया...

फिल्म

फिल्म : अरब-एशिया का सिनेमा

प्रताप सिंह अरब-एशिया के सिनेमा पर केंद्रित ओसियान सिनेफेन फिल्म समारोह दो साल के अंतराल के बाद नए शिगूफे और कुछेक दिलचस्प फिल्मों के साथ...
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सार्वजनिक साहित्यिक संस्थाओं का राजनैतिक रूपांतरण

राजेश जोशी, कुमार अम्बुज व नीलेश रघुवंशी पिछले एक दशक में मध्य प्रदेश के भारत भवन, साहित्य परिषद, उर्दू अकादमी और कला परिषद सहित...

कहां है वह साहस?

तरुण तेजपाल उस इंडिया इंक प्रकाशन घराने के पार्टनरों में से एक थे, जिसने शुरू में मेरे उपन्यास गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स को छापा...

क्या विकास पूरा हो चुका है?

लूई प्रोयेक्ट पूंजीवाद के संकट का सवाल विश्व के प्रमुख औद्योगिक राष्ट्रों के सम्मुख जिस तरह खड़ा है वैसा 1930 के दशक के बाद कभी...

संपादकीय : ‘दैवीय आपदा’ का दानवीय सच

उत्तराखंड की त्रासदी जिस हद तक मानव निर्मित है वह स्तब्धकारी है। आपदा होने से कहीं ज्यादा यह दुर्घटना है जिसे निश्चय ही रोका...

संपादकीय : परिवारवाद पर चोट

और जो भी हो इंडिया अगेंस्ट करप्शन और इसके नेता अरविंद केजरीवाल का हमें आभारी होना होगा कि उन्होंने भारतीय राजनीति में फैले व्यापक...

सिटिजन जैन और भारतीय मीडिया के अनाचार की कहानी

''तुमसे मुझे सहानुभूति है। तुम समझते हो कि मैं एक बदमाश हूं, मेरे अखबार को तुरंत बंद कर दिया जाना चाहिए, मेरी जांच के...
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