समयांतर (मुद्रित संस्करण) वार्षिक ग्राहक बनने का आसान तरीका

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बौद्धिक दरिद्रता के वारिस

संपादकीय से विडंबना कहा जाए या त्रासदी कि वर्तमान सरकार उन बौद्धिक संस्थाओं के लिए, जिन्हें लेकर उसका राजनीतिक और बौद्धिक संगठन जरूरत से ज्यादा संवेदनशील है, ऐसे व्यक्तियों को भी नहीं ढूंढ पा रहा है जो इन संस्थाओं का पद संभालने के लिए उपयुक्त हों। यह कैसी विडंबना है कि वह सत्ताधारी दल जिसने [Read the Rest…]

तेलंगाना को अपना करमचेडू चाहिए

हाशिये की आवाज भारतीय संघ का सबसे नया राज्य तेलंगाना एक लंबे चले जनसंघर्ष के जरिए बना था, जिसमें बताया जाता है कि 600 से ज्यादा नौजवानों ने अपनी कुर्बानियां दी थीं। लेकिन अपने बनने एक साल से भी कम वक्त में इसके गरीब तबके और खास कर दलितों की गलतफहमियां दूर हो रही हैं, [Read the Rest…]

नए माध्यम पर आस्था रखें

समयांतर के इस नए अवतार के लिए साधुवाद। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। अन्य कई पत्रिकाओं की तरह ही हम समयांतर के प्रिंट संस्करण के एकाध अंक ही देख पाए थे। बीच-बीच में चर्चा जरूर सुनते रहे। अब नेट पर आ जाने से नियमित देख पाऊंगा। प्रिंट के प्रति आपका आग्रह समझ में आता है, [Read the Rest…]

लेखक समाज का प्रतिपक्ष कहां है?

‘हिंदू समय में दिनकर'(जून) लिखते हुए रामाज्ञा शशिधर की कलम के साथ दिनकर के प्रति कोमल भावना अंत:सलिला-सी संचारित है। जो लोग दिनकर का जीवन और लेखन सधे गणित से संचालित नहीं मान पाते वे रामाज्ञा जी के अंदाज में बखानेंगे। प्रसिद्ध है कि दिनकर ने यशपाल के नेहरू विरोध के उदाहरण जवाहरलाल को रेखांकित [Read the Rest…]

नश्वरता के परिवर्तनशील बोध का आख्यान

पत्र बेशक यासिर रिजवी की समीक्षा (समयांतर, जून)बेहद रोचक, यथार्थपरक और भविष्यबोधक है। लेखक डॉक्टर अतुल गवांडे की पुस्तक बीइंग मॉर्टल: मेडिसिन एंड व्हॉट मैटर्स इन द एंड दीर्घ अनुभव व अध्ययन पर आधारित है। लेकिन यासिर ने जिस निजी अनुभव के माध्यम से आधुनिक जीवन में नश्वरता के परिवर्तनशील बोध का आख्यान चित्रित किया [Read the Rest…]

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