Home

[wpb-latest-product title=”Magzines”]

Like us on Facebook

चर्चा में

संस्मरण : असहमति के सहयात्री

राजेंद्र यादव को याद करते हुए ऐसा जीवंत व्यक्ति हिंदी में शायद ही दूसरा कोई हो। राजेंद्र जी अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो पिछले दो दशकों से हिंदी की प्राणहीन,...

घटनाक्रम – दिसंबर 2013

निधन - प्रसिद्ध कनाडाई डाक्यूमेंटरी फिल्मकार पीटर विन्टॉनिक का कैंसर से निधन। उनकी सर्वाधिक चर्चित फिल्मों में मैन्युफैक्चरिंग कांसेंट: नोम चोम्स्की एंड द मीडिया तथा सिनेमा वेराइटे: डिफाइनिंग द...

साहित्य – पटना : कविता का रागदरबारी

अजय सिंह सन् 1970 के दशक के हमारे दोस्त - वामपंथी रुझान के हिंदी कवि - आलोकधन्वा और मंगलेश डबराल उन 43 कवियों में शामिल हैं, जो बिहार सरकार...

शिक्षा :बदलेंगे चित्र तो बदलेगा मानस

गायत्री आर्य मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूली किताबों से ऐसे सभी चित्र बदलने को कहा है जिसमें लड़कियों को लड़कों के मुकाबले कमतर दिखाया जा रहा हो। उत्तराखंड...

संपादकीय : रास लीला, राम लीला और ‘न्याय लीला’

उपरोक्त शब्दों में तीसरा शब्द जो अर्थ प्रेषित करता है वह रास लीला और राम लीला से बिल्कुल भिन्न है। 'न्याय लीला’ कहते ही जो बोध होता है वह...

घटनाक्रम : मई 2013

निधन - प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखिका रूथ प्रवेर झाबवाला मूल (7 मई, 1927-3 अप्रैल, 2013) का न्यूयार्क में निधन। जर्मन यहूदी मूल की झाबवाला ने भारतीय वास्तुकार साइरस झाबवाला...

कितना बचा है वह शब्द?

प्रमीला के.पी. लगभग अनामंत्रित: अशोक कुमार पाण्डेय, शिल्पायन, पृष्ठ-136, मूल्य: 175 ISBN 81-89918-91-0 कवियों के मेलों व कविताओं के' ट्रैफिक जाम' में अशोक कुमार पांडेय की कविताओं की अलग...

सामान्य गुजरात बनाम मोदी का गुजरात

इस तथ्य से सभी अवगत हैं कि गुजरात प्रदेश प्राचीन समय से ही समृद्ध रहा है। यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशु-पालन और वाणिज्य था। इसमें यहां के...

हाशिये पर खुश वामदल

भारत की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की 21वीं कांग्रेस पटना में 31 मार्च को और देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)...

पाठ्यक्रम और छात्रों के बीच

प्रेमपाल शर्मा एन.सी.ई.आर.टी. में निदेशक के रूप में पांच साल पूरा करने के बाद कृष्ण कुमार वापस दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में मार्च 2010 के पहले सप्ताह में पहुंच...

व्यक्ति स्वतंत्र्य बनाम राज्य : ‘मैंने वह किया जो उचित मानता हूं’

एडवर्ड स्नोडेन 12 जुलाई को मास्को में दिया गया वक्तव्य मेरा नाम एडवर्ड स्नोडेन है। एक महीने से थोड़ा पहले तक मेरा एक परिवार था, स्वर्ग में एक...

दिल्ली मेल : शारीरिक बनाम मानसिक रुग्णता

पहले यह टिप्पणी देख लीजिए: ''एक गोष्ठी में एक थोड़े जी आए और एक अकादमी बना दिए गए कवि के बारे में बोले वह उन थोड़े से कवियों में...

साक्षात्कार : अचानक आनेवाली बाढ़ें मानव निर्मित अपदायें हैं

अंतराष्ट्रीय ख्याति के भूगर्भ वैज्ञानिक व पर्यावरण विद खडग़ सिंह वल्दिया से अनुपम चक्रवर्ती की बातचीत प्र: हिमालय तथा भारत के अन्य भागों में अचानक आनेवाली बाढ़ें रह-रह कर आने...

सोशल मीडिया पर लगाम

यह तो एक बहाना है : पीयूष पंत अगर हम उन लोंगो की अभिव्यक्ति की आजादी पर विश्वास नहीं करते जो हमें ना पसंद हैं तो इसका सीधा मतलब...

खाप पंचायतों की राजनीति- भेड़ की खाल में

धीरेश सैनी जींद जिले के बीबीपुर गांव में हुई महापंचायत में कन्या भूण हत्या के खिलाफ लिया गया फैसले का मकसद दुनिया की आंखों में धूल झोंकने, अपना चेहरा चमकाने...

मीडिया

मिले सुर मेरा तुम्‍हारा…

एक साक्षात्‍कार की कहानी कारपोरेट मीडिया किस तरह से सत्ताधारियों और पूंजी के हितों को साधता है इसका उदाहरण उत्तराखंड की आपदा है। हिंदू तीर्थ केदारनाथ...

फिल्म

फिल्म : अरब-एशिया का सिनेमा

प्रताप सिंह अरब-एशिया के सिनेमा पर केंद्रित ओसियान सिनेफेन फिल्म समारोह दो साल के अंतराल के बाद नए शिगूफे और कुछेक दिलचस्प फिल्मों के साथ...
0FansLike
64,303FollowersFollow
3,396SubscribersSubscribe
- Advertisement -

श्रृद्धांजलि : असगर अली इंजीनियर

(10 मार्च, 1939 - 15 मई, 2013) मेरा अज्म इतना बुलंद है कि पराये शोलों का डर नहीं मुझे खौफ आतिशे गुल से है...

रिपोर्ताज : तीन गांवों की कहानी

अभिषेक श्रीवास्तव जल सत्याग्रह के यथार्थ, जनसंगठनों और मीडिया के संबंधों पर एक नजर यह कहानी तीन गांवों की है। याद करिए कि अगस्त के आखिरी...

ईरान पश्चिमी जगत और तेल की राजनीति

महेन्द्र मिश्र ईरान का दुनिया की पुरानी सभ्यताओं में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। इसका इतिहास आसपास के विस्तृत क्षेत्र से अविभाज्य रूप से जुड़ा...

कविता का जनपक्षधर चेहरा

दीपक प्रकाश त्यागी बुरे समय में नींद: रामाज्ञा शशिधर, अंतिका प्रकाशन, मूल्य: 100 चाल्र्स डिकेन्स के प्रसिद्ध उपन्यास ए टेल ऑफ टू सिटीज में...

पूंजीवाद के अंतरविरोध और मौजूदा संकट

अरुण फरेरा हाल ही में लालच को लेकर दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया में लेखों की एक शृंखला प्रकाशित हुई। सप्ताह में दो दिन छपने...
[testimonial_count]