बदले संदर्भों की चुनौतियां और लेखक

छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की नेतृत्ववाली भारतीय जनता पार्टी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने पर (आश्चर्यजनक है कि आखिर यह आयोजन दस वर्ष पूरे होने पर क्यों नहीं किया गया होगा! क्या 11 का महत्त्व हिंदू सगुन-सा कुछ रहा होगा?)12-14 दिसंबर को आयोजित रायपुर साहित्य महोत्सव मुख्यत: हिंदी और स्थानीय बोलियों पर केंद्रित था, जिसमें नए-पुराने अन्य माध्यमों  पर भी चर्चा की गई। आयोजन में – इवेंट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा आयोजित होने के कारण भव्य होना जिसकी नियति थी – शामिल होने के लिए लेखकों को हवाई जहाज का किराया, पांच सितारा होटलों की मेहमाननवाजी और मोटी फीस दी गई। शामिल होने वालों की सूची को देखा जाए तो इसमें लेखकों की भीड़  जरूर थी पर भागीदारी, महत्त्व के हिसाब से, हल्की थी। कुल मिलाकर पांच ऐसे नाम हैं जिन्हें महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है। इनमें से भी विनोद कुमार शुक्ल स्थानीय हैं और हाल ही में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह, जो भी कारण रहा हो, पहुंचे ही नहीं। यानी बचे तीन। इस तरह कुल मिलाकर इसे स्थानीय, युवा, उभरते और प्रौढ़ावस्था में भी युवा के रूप में जाने-जाने वाले संघर्षरत लेखकों और साहित्यकार बनने/कहलाने के महत्त्वाकांक्षी पत्रकारों का जमावड़ा कहा जा सकता है। दूसरी ओर बड़ी बात यह है कि सारे लालचों के बावजूद कई लेखकों ने इस निमंत्रण को स्वीकार ही नहीं किया। इससे आगे के  पेजों को देखने  लिये क्लिक करें NotNul.com 

असहमति का सम्मान करने का स्वांग

मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में 12-14 दिसंबर 2014 को छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने जिस साहित्य-महोत्सव का आयोजन किया, उसे जनवादी लेखक संघ असहमति का सम्मान करने के स्वांग और एक राजनीतिक छलावे के रूप में देखता है। जिस राज्य की सरकार सेना और पुलिस का इस्तेमाल कर विदेशी कॉरपोरेट हितों की पूर्ति के [Read the Rest…]

‘घर वापसी’: हिंदू धर्म के नरक में आपका स्वागत है

हाशिये की आवाज सत्ता के नशे में चूर, छुपे हुए हजार सिरों वाला संघ परिवारधार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुसंख्यक आबादी में नफरत फैला रहा है, जिसमें वह गोएबलीय निरंतरता के साथ झूठ और जहरीली साजिशों का सहारा ले रहा है। अति-राष्ट्रवादी लफ्फाजी करते हुए यह इस राष्ट्र के, जो अभी परिपूर्ण नहीं है, नाजुक ताने-बाने [Read the Rest…]

‘स्वच्छता अभियान’ जारी है

समाचार-संदर्भ   दिल्ली आइआइटी प्रसंग    वर्ष 2014 के अंतिम सप्ताह में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली के निदेशक रघुनाथ के शिवगांवकर के अपने पद से इस्तीफा देने के ने कम-से-कम एक बात सिद्ध कर दी है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की नीतियों और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही है। [Read the Rest…]

निठारी में अपराध–ईपीडबल्यूबी का संपादकीय

समयानतर मत पिछले महीने के पहले पखवाड़े में देश की दो प्रमुख अंग्रेजी पत्रिकाओं ने निठारी कांड के अभियुक्त सुरेंद्र कोली को मृत्युदंड दिए जाने और इस कांड की जांच में हुई संभावित गलतियों की ओर इशारा करते हुए इसकी वैधता पर तो प्रश्नचिन्ह लगाया ही है साथ ही स्वयं मृत्युदंड की उपादेयता पर भी [Read the Rest…]

मेक इन इंडियाः पर खरीदेगा कौन?

मेक इन इंडिया का नारा  प्रधान मंत्री मोदी की खोटी आर्थिकी की देन है। यह नारा कहां तक सफल होगा, इसकी पड़ताल कर रहे हैं आतिफ रब्बानी    मोदी सरकार ने कार्य करते हुए दो सौ दिन का आंकड़ा छू लिया है। इस दौरान ‘सबका साथ और सबका विकास’ भले ही हुआ हो या न [Read the Rest…]

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