• मुखपृष्ठ
  • हमारे बारे में..
  • पिछ्ले अंक
  • Subscribe To Print Edition
Samyantar
विचार और संस्कृति का मासिक
  • संपादकीय
  • समाचार-संदर्भ
  • विचार
  • मीडिया
  • दिल्ली मेल
  • दृष्टिको‡ण
  • प˜त्रकारिता
  • फिल्म
  • कविता
  • विविध
Browse: Home / nitish kumar

nitish kumar

बिहार : तीन मुखियाओं की कहानी और 2014 का चुनाव अभियान

बिहार : तीन मुखियाओं की कहानी और 2014 का चुनाव अभियान

Author: ग़ोपाल कृष्ण Edition : July 2012 Translation : विष्णु शर्मा

पहले मुजफ्फरपुर जिले के मारवन ब्लॉक के अंतर्गत झाखरा शेख पंचायत के पूर्व मुखिया तारकेश्वर गिरी को फर्जी केस में फंसा कर दो महीने चार दिन के लिए जेल में बंद रखा गया। वह 2001-5 के दौरान मुखिया थे। इसके बाद उनकी सीट आरक्षित श्रेणी में आ गई। उन पर लगा फर्जी केस आज भी [Read the Rest...]

मित्रों को पढ़ायें :

  • Share
  • Facebook
  • Email
  • Twitter
  • StumbleUpon
  • Google +1
  • Digg
  • Reddit
  • Print

Posted in विचार | Tagged asbestos, bihar, nitish kumar | Leave a response

मूर्तिकार मनोज पंकज द्वारा बथानी नरसंहार के शदीहों को श्रद्धांजलि देती प्रतिमा

बथानी टोला जनसंहारः न्याय का पाखंड

Author: सुभाष गाताडे Edition : May 2012

बथानी टोला जनसंहार के बारे में उच्च अदालत का फैसला आ गया है। पटना हाईकोर्ट ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति ए के सिंह की द्विसदस्यीय बेंच ने पिछले दिनों यह फैसला सुनाया। पीडि़तों के वकील आनन्द वात्स्यायन भी फैसले से हतप्रभ हैं। उनके मुताबिक ”जनसंहारों के [Read the Rest...]

मित्रों को पढ़ायें :

  • Share
  • Facebook
  • Email
  • Twitter
  • StumbleUpon
  • Google +1
  • Digg
  • Reddit
  • Print

Posted in समाचार-संदर्भ | Tagged bathani tola massacre, bihar politics, cast struggle, court order, nitish kumar, ranvir sena | Leave a response

Enter your email address to subscribe to समयांतर and receive notifications of new articles by email.

Join 314 other subscribers

Latest Edition

  • लातिन अमेरिका : विचारधारा नहीं, आर्थिक प्रयोगों का समाजवाद
  • तीसरी दुनिया के लिए शावेज का महत्व
  • घटनाक्रम : फरवरी 2013
  • मीडिया राष्ट्रीयता और पंजीवाद
  • पुस्तकांश : प्रतिरोध और जागरण का आगमन
  • भारत का अंधेरा
  • ऊंची विकास दर का मिथक
  • पूंजी का संकट और समाजवादी प्रयोग
  • वामपंथ ने जेंडर के सवाल को पूरी तरह छोड़ दिया
  • अस्मिता की राजनीति असली संघर्षों से ध्यान बंटाती है
  • अस्मिता की लड़ाई और वाम
  • मार्क्‍सवाद की प्रासंगिकता और पुनर्रचना
  • ऑक्युपाई आंदोलन के निहितार्थ
  • भटकाव का शिकार है माकपा नेतृत्व
  • पर्यावरणीय असंतुलन मुनाफे की देन
  • क्या विकास पूरा हो चुका है?
  • ‘जमीनहीन अस्थायी मजदूर या जो शहरी गरीब हैं वे राजनीतिक विमर्श से बाहर हैं’
  • पूंजीवाद के अंतरविरोध और मौजूदा संकट
  • असंभव समय से सामना
  • सिद्धांत और व्यवहार

अब तक सबसे ज्यादा पढ़े गये

  • भारत में सिनेमा के सौ साल – 1 - 1,912 लोगों ने पढ़ा
  • ब्रह्मांड की रचना और हिग्स बोसॉन यानी कण-कण में विज्ञान - 1,720 लोगों ने पढ़ा
  • हिंदी उपन्यास में देह व्यापारः स्त्री की नजर से - 1,708 लोगों ने पढ़ा
  • संपादकीय : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम पैसा कमाने की स्वतंत्रता - 1,492 लोगों ने पढ़ा
  • भारत में सिनेमा के सौ साल – 2 - 1,347 लोगों ने पढ़ा
  • टिहरी बांध : बांध में डूबी जिंदगियां - 1,275 लोगों ने पढ़ा
  • मीडिया और मोदी - 1,246 लोगों ने पढ़ा
  • पूंजीवाद एक प्रेत कथा-भाग एक - 1,245 लोगों ने पढ़ा
  • बांध : विकास नहीं विनाश का पर्याय - 1,167 लोगों ने पढ़ा
  • मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार – 1 - 1,030 लोगों ने पढ़ा

हाल में ज्यादा पढ़े गये

  • मीडिया राष्ट्रीयता और पंजीवाद
  • अस्मिता की राजनीति असली संघर्षों से ध्यान बंटाती है
  • पूंजी का संकट और समाजवादी प्रयोग
  • लातिन अमेरिका : विचारधारा नहीं, आर्थिक प्रयोगों का समाजवाद
  • हिंदी उपन्यास में देह व्यापारः स्त्री की नजर से
  • भारत में सिनेमा के सौ साल - 1
  • घटनाक्रम : फरवरी 2013
  • पूंजीवाद के बर्बर पशु को खुला छोड़ने के मायने
  • पुस्तकांश : प्रतिरोध और जागरण का आगमन

Last Edition

  • लोक साहित्य /कविता : ताकि मुट्ठी बंधी रहे
  • कविता और समाज : लोकगायक का स्वर और आतंकित सत्ता का विष वमन
  • फिल्म : चक्रव्यूह में फंसे आदिवासी
  • अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह : इस सैरगाह से दूर नया घर बनाइए
  • भारत के कॉरपोरेट संपादक और ब्रिटेन की लेवसन रिपोर्ट
  • एक दूब का पाश
  • भारतीय विचारधाराः मिथक से यथार्थ की ओर
  • अमरीकी प्रतिसंस्कृति के चौराहे पर खड़ा संगीतकार
  • श्रद्धांजलि : ध्वनियों और श्रव्य संरचना का संधान
  • समयांतर और संन्यासी
  • घटनाक्रम–जनवरी 2013
  • दिल्ली मेल : गुरुओं का गुरुत्वाकषर्ण
  • परिदृश्य : संवेदनहीन समाज में औरत
  • उत्तराखंड : आओ राजधानी- राजधानी खेलें
  • सत्ता और स्त्री : लोकतंत्र और बलात्कार का रूपक
  • बलात्कारी संस्कृति, पितृसत्ता और राज सत्ता
  • स्त्री और समाज : बलात्कार अभी नहीं थमेंगे …!
  • भारत विभाजन क्यों हुआ?
  • वालमार्ट में बढ़ता श्रमिक संघर्ष
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मतलब

Recent Comments

  • j.p.narela on अस्मिता की राजनीति असली संघर्षों से ध्यान बंटाती है
  • Pankaj Kumar on पर्यावरणीय असंतुलन मुनाफे की देन
  • कृति on असंभव समय से सामना
  • sanjeevkhudshah on स्त्री और समाज : बलात्कार अभी नहीं थमेंगे …!
  • sanjeevkhudshah on फिल्म : चक्रव्यूह में फंसे आदिवासी

RSS नैनीताल समाचार

  • आशल-कुशल : मई -2013-1
  • सांस्कृतिक पदयात्रा से जानीं नंधौर क्षेत्र की तकलीफें
  • एक सीधे पहाड़ी के नुकीले सपने .11
  • कानून तो हैं, पालन नहीं होता
  • ‘गढ़वाली’ को याद करते हुए की सिविल नाफरमानी की घोषणा
  • दो शब्द श्रद्धांजलि के भी नहीं थे उनके लिये !
  • वन विभाग की शह पर होती है तस्करी
  • राजजात 2013: कई चुनौतियाँ होंगी हमारे सामने
  • वनाग्नि रोकने के लिये चीड़ का सफाया जरूरी है
  • कभी दामिनी…कभी गुडि़या

Copyright © 2013 Samyantar.

Powered by Samayantar.

Many Times we use pictures which come using Google Image Search. It is not possible to give Credit Every time. These Pictures have been used for educational and non profit activities. If any copyright is violated, kindly inform and we will promptly remove the picture.
loading Cancel
Post was not sent - check your email addresses!
Email check failed, please try again
Sorry, your blog cannot share posts by email.