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हाशिये पर खुश वामदल

हाशिये पर खुश वामदल

Author: कृष्ण सिंह Edition : May 2012

भारत की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की 21वीं कांग्रेस पटना में 31 मार्च को और देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की 20वीं कांग्रेस अप्रैल के पहले पखवाड़े में केरल के कोझिकोड में समाप्त हुई। पश्चिम बंगाल में 35 साल के शासन के बाद वाममोर्चा को मिली [Read the Rest...]

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मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार - 2

मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार – 2

Author: यॉन मिर्दल Edition : May 2012 Translation : प्रशांत राही

[10 फरवरी, 2012 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में आयोजित नवीन बाबू स्मृति व्याख्यान में यॉन मिर्दल द्वारा दिये गये भाषण का दूसरा भाग। पहला भाग यहाँ पढ़ें।] मार्क्स ने कभी भविष्य के लिए कोई नुस्खे नहीं सुझाये। इससे ज्यादा , जैसा कि एंगेल्स ने बताया है, अहम् यह है कि मार्क्स के लेखन [Read the Rest...]

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मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार - 1

मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार – 1

Author: यॉन मिर्दल Edition : May 2012 Translation : प्रशांत राही

[10 फरवरी, 2012 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में आयोजित नवीन बाबू स्मृति व्याख्यान में यॉन मिर्दल द्वारा दिये गये भाषण का पहला भाग] सबसे पहले यह बतलाना जरूरी है कि मैं बोल किसकी ओर से रहा हूं। मैं कम्यूनिस्ट हूं। मगर लगभग 60 साल से एक गैर-पार्टी कम्युनिस्ट रहा हूं। इसके कारणों की [Read the Rest...]

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  • भारतीय विचारधाराः मिथक से यथार्थ की ओर
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अब तक सबसे ज्यादा पढ़े गये

  • भारत में सिनेमा के सौ साल – 1 - 1,867 लोगों ने पढ़ा
  • ब्रह्मांड की रचना और हिग्स बोसॉन यानी कण-कण में विज्ञान - 1,694 लोगों ने पढ़ा
  • हिंदी उपन्यास में देह व्यापारः स्त्री की नजर से - 1,648 लोगों ने पढ़ा
  • संपादकीय : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम पैसा कमाने की स्वतंत्रता - 1,470 लोगों ने पढ़ा
  • भारत में सिनेमा के सौ साल – 2 - 1,317 लोगों ने पढ़ा
  • टिहरी बांध : बांध में डूबी जिंदगियां - 1,253 लोगों ने पढ़ा
  • पूंजीवाद एक प्रेत कथा-भाग एक - 1,227 लोगों ने पढ़ा
  • मीडिया और मोदी - 1,218 लोगों ने पढ़ा
  • बांध : विकास नहीं विनाश का पर्याय - 1,147 लोगों ने पढ़ा
  • मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार – 1 - 1,010 लोगों ने पढ़ा

हाल में ज्यादा पढ़े गये

  • पूंजी का संकट और समाजवादी प्रयोग
  • पूंजीवाद के बर्बर पशु को खुला छोड़ने के मायने
  • ऊंची विकास दर का मिथक
  • मार्क्‍सवाद की प्रासंगिकता और पुनर्रचना
  • वामपंथ ने जेंडर के सवाल को पूरी तरह छोड़ दिया
  • लेख : समाजवाद नए समाज की मांग करता है
  • हिंदी उपन्यास में देह व्यापारः स्त्री की नजर से
  • भारत का अंधेरा
  • भारत-पाक संबंध : बर्फीले संबंध और ग्लेशियर की दरारें

Last Edition

  • दिल्ली मेल : कौन बनेगा अकादेमी पति
  • लोक से दूर होती संस्कृति
  • फैजाबाद के दंगे में मीडिया की भूमिका
  • मीडिया : पत्रकारों को हत्यारा किसने बनाया?
  • श्रीलाल शुक्ल सम्मान : सम्मान ऐसे ही किया जाता हैं?
  • समीक्षा : लखनवी छोरा
  • विवाद : विद्वेष भरी विद्वता
  • लेख : रंगभेद की पहली सीख
  • महबूबा था कैसे लिखूं : सत्ता-राजनीति, पुलिस और कविता
  • डूरंड रेखा : उपराष्ट्रीयताओं का सवाल
  • झारखंड नहीं लूटखंड है यह प्रदेश
  • हरियाणा : माओवाद के नाम पर दलितों और भूमिहीनों का दमन
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  • बाल ठाकरे : प्रामाणिक भारतीय फासीवाद
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