मार्क्सवाद की प्रासंगिकता और पुनर्रचना
प्रस्तुत लेख की शुरुआत मैं एक चीनी हिंदी विद्यार्थी1 के चंद विचारपूर्ण वाक्यों से करूंगा। कुछ वर्ष पहले इस युवा विद्यार्थी से मैं दिल्ली में मिला था। तब चीन में बहुराष्ट्रीय कंपनियों और विदेशी पूंजी नियोजन को लेकर मीडिया में काफी चर्चाएं थीं। आंकड़े दिए जा रहे थे कि चीन ने कितनी बड़ी मात्रा में [Read the Rest...]
‘जमीनहीन अस्थायी मजदूर या जो शहरी गरीब हैं वे राजनीतिक विमर्श से बाहर हैं’
अरुंधति रॉय से नरेन सिंह राव की बातचीत [हमारे इस दौर में अरुंधति रॉय एक ऐसी विरल लेखिका हैं जो सरकारी दमन, अन्याय और कॉरपोरेट घरानों की लूट के खिलाफ पूरी निडरता और मुखरता के साथ लगातार अपनी कलम चलाती रहती हैं। वह समाज के सबसे वंचित, शोषित और हाशिए पर खड़े लोगों के साथ [Read the Rest...]
लेख : समाजवाद नए समाज की मांग करता है
रणधीर सिंह ‘भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत के अगले दिन लाहौर सेंट्रल जेल के सामने मानवता का उभरता हुआ एक समुद्र, हर आंख में आंसू, पर गर्व से तने चेहरे; हर जगह शहीदों के पोस्टर और कभी समाप्त न होने वाले नारे – इंकलाब जिंदाबाद… उस सुबह एक सपने का उदय हुआ जो [Read the Rest...]
फिल्म : चक्रव्यूह में फंसे आदिवासी
रामप्रकाश अनंत प्रकाश झा की तीसरी फिल्म है चक्रव्यूह, नक्सल आंदोलन पर बनी है। नवंबर, 2009 में देश के गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम से एक सशस्त्र सैनिक कार्रवाई शुरू की थी। उसके बाद मार्च, 2010 के आउटलुक में अरुंधती रॉय का लेख आया ‘वॉकिंग विद कॅमरेड्स’। [Read the Rest...]
हरियाणा : माओवाद के नाम पर दलितों और भूमिहीनों का दमन
राजेश कापड़ो हरियाणा सरकार सन 2005 से ही, विभिन्न जनसंगठनों के सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर, झूठे मुकदमे थोप लगातार मानव अधिकारों का हनन कर रही है। लगभग 200 कार्यकर्ताओं को झूठे व राजनीति से प्रेरित मुकदमों में गिरफ्तार किया जा चुका है। इस तरह से फंसाए गए ज्यादातर लोग भूमिहीन व खासतौर से [Read the Rest...]
नोबेल पुरस्कार : खामोशी के निहितार्थ
नवीन पाठक चीनी लेखक मो यान को इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा करते हुए स्वीडिश अकादेमी ने कहा कि ”वह लोककथाओं, इतिहास और समकालीनता को इंद्रजालिक (हेल्यूसिनेटरी) यथार्थ में मिला कर प्रस्तुत करते हैं।” मो यान का लेखन और जीवन वर्तमान चीनी राज्य व्यवस्था में रहने और काम करनेवाले लेखकों, कलाकारों और [Read the Rest...]
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