अस्मिता की राजनीति असली संघर्षों से ध्यान बंटाती है
आनंद तेलतुंबड़े से भूपेन सिंह का साक्षात्कार आनंद तेलतुंबड़े आइआइटी खडग़पुर में प्रबंधन के प्रोफेसर हैं। उन्होंने भारत में जाति, वर्ग, राजनीतिक अर्थशास्त्र और लोकतांत्रिक राजनीति पर करीब दो दर्जन किताबें लिखी हैं। उन्हें देश और दुनिया में मौलिक प्रस्थापनाओं के लिए जाना जाता है और काफी सम्मान के साथ पढ़ा-सुना जाता है। वह प्रसिद्ध [Read the Rest...]
हरियाणा : दलित उत्पीड़न का जातीय समीकरण
धीरेश सैनी दिल्ली से सटा हरियाणा देसी-ग्रामीण मिजाज वाले विकसित राज्य के तौर पर जाना जाता है। यहां की सड़कें, यहां के गबरू जवान, यहां की बोली-बानी, यहां के खिलाड़ी लड़के-लड़कियां, यहां के नेता, यहां तक कि यहां की बदतमीजियां सब कुछ ग्लेमर के साथ पेश की जाती हैं। अहा ग्राम्य जीवन के सुरूर में [Read the Rest...]
समाज-व्यवस्था :वर्ण व्यवस्था का पायदान
मैत्रेयी पुष्पा अदृश्य भारत: भाषा सिंह; पेंगुइन बुक्स; मूल्य: 199, पृ.सं.:212 पेपरबैक संस्करण ISBN : 978-0-143-41643-2 हमारे देश की वर्णव्यवस्था का प्रारूप बड़ी चतुराइयों, कुशलताओं और ताकतवरी के नटबोल्टों को मुस्तैदी के साथ कस ठोककर बनाया गया है कि यह एक कठोर और मजबूत किले की भांति आज तक खड़ा है और समानतावादी इसको [Read the Rest...]
बथानी टोला जनसंहारः न्याय का पाखंड
बथानी टोला जनसंहार के बारे में उच्च अदालत का फैसला आ गया है। पटना हाईकोर्ट ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह और न्यायमूर्ति ए के सिंह की द्विसदस्यीय बेंच ने पिछले दिनों यह फैसला सुनाया। पीडि़तों के वकील आनन्द वात्स्यायन भी फैसले से हतप्रभ हैं। उनके मुताबिक ”जनसंहारों के [Read the Rest...]
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