घटनाक्रम : अगस्त 2012
निधन – नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सहयोगी लक्ष्मी स्वामीनाथन सहगल (24 अक्टूबर, 1914 – 23 जुलाई, 2012) का कानपुर में निधन। लक्ष्मी सहगल सिंगापुर में अपनी डाक्टरी की प्रैक्टिस छोड़कर आजाद हिंद फौज में शामिल हुई थीं। वह लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की कप्तान बनीं और आजादी के लिए उत्तरपूर्व के मोर्चे पर अंग्रेजों से लड़ीं। [Read the Rest...]
निधन : मृणाल गोरे
1928- 17 जुलाई 2012 मृणाल गोरे ने उम्र के 84 सालों में से 70 साल राजनीतिक संघर्ष में बिताए। 1942 में कांग्रेस के ‘भारत छोड़ो’ आह्वान पर उन्होंने डाक्टरी की पढ़ाई छोड़ दी। फिर राष्ट्र सेवा दल से जुड़ गईं और 1948 में सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हुईं। 1961 में बंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन (बीएमसी) के [Read the Rest...]
किताब के बहाने: अमेरिका में सराबोर भारत
गिरीश मिश्र पिछली सदी के आखिरी दो दशकों से नवउदारवाद की आंधी चल रही है। इसके साथ ही यह दावा जोर-शोर से किया जा रहा है कि देर-सबेर सारी दुनिया अमेरिकी रंग में सराबोर हो जाएगी। दूसरे शब्दों में विश्व के सब देशों का अमेरिकीकरण हो जाएगा। यह दावा 12 अक्टूबर 1999 को पूर्व अमेरिकी [Read the Rest...]
पाठ्यक्रम और छात्रों के बीच
प्रेमपाल शर्मा एन.सी.ई.आर.टी. में निदेशक के रूप में पांच साल पूरा करने के बाद कृष्ण कुमार वापस दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में मार्च 2010 के पहले सप्ताह में पहुंच गए हैं। उनके कार्यकाल में बनाया गया पाठ्यक्रम और ऐतिहासिक दस्तावेज एन.सी.एफ. 2005 शिक्षा जगत में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। मैं अपने को खुशकिस्मत मानता हूं [Read the Rest...]
ईरान पश्चिमी जगत और तेल की राजनीति
महेन्द्र मिश्र ईरान का दुनिया की पुरानी सभ्यताओं में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। इसका इतिहास आसपास के विस्तृत क्षेत्र से अविभाज्य रूप से जुड़ा रहा – डेन्यूब नदी से लेकर सिंधु नदी तक और कॉकेशस से लेकर दक्षिण में मिस्र तक। एक जमाना था कि फारस एक बड़ा साम्राज्य था जो महाशक्ति के रूप [Read the Rest...]
मीडिया का भगवान
रामप्रकाश अनंत अनजानी चीजों के बारे में जानने की मनुष्य की स्वाभाविक जिज्ञासा रही है। इसी जिज्ञासा के चलते दो मतों का विकास हुआ। पहले मत में वे लोग आते हैं जो समझ में न आने वाले सवालों को एक दिव्य शक्ति के द्वारा हल कर लेते हैं और मानते हैं कि ये चीजें एक [Read the Rest...]
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