अब डिमांड पर दंगे?
हैदराबाद के पुराने हिस्से में भड़के दंगे की आग अब थम सी गयी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब चीजें सामान्य हो जाएंगी, मगर इस छोटेसे अंतराल में सैदाबाद एवं मदन पेट इलाके के आम नागरिकों पर क्या गुजरी इसकी भरपाई क्या कभी हो पाएगी, यह सवाल विचारणीय हो उठा है। दंगों के बारे [Read the Rest...]
वे अदालतों के पार हैं
21 अप्रैल, दिन के ढाई बजे, दिल्ली की गहमा-गहमी भरी तीस हजारी अदालत, जहां पत्रकार एसएमए काजमी को पेश करना था पर एकाएक पता चलता है कि आज उनकी तारीख नहीं है पर थोड़ी ही देर में पता चलता है उन्हें दिन के बारह बजे वीडियो लिंक के जरिए पेश कर दिया गया, जिसका कोई [Read the Rest...]
व्यवसायिकता और सरकारी तंत्र के बीच
भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में तमाम ऐसे चैनल हैं जो दिन-रात खबरें, मनोरंजन, और सनसनी परोसने और टीआरपी बटोरने की होड़ में लगे रहते हैं। इस सब के दौरान भारतीय जन और जनतंत्र किस तरह हाशिए की चीज बनता जा रहा है इसका ख्याल व्यवसायिकता की दौड़ में तल्लीन इन तमाम निजी चैनलों को नहीं है। [Read the Rest...]
‘जो कहा जाना चाहिए’ सो कहा जाना चाहिए
खराब कविता बनाम बड़ा सरोकार: एक टिप्पणी जर्मन कथाकार, कवि, मूर्तिकार और लेखक गुंटर ग्रास की कविता ‘जो कहा जाना चाहिए’ मात्र लेखक की सामाजिक भूमिका के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी नहीं है बल्कि लेखकों, रचनाकारों और कलाकारों को एक आह्वान भी है कि जब चीजें सर से गुजर जाएं तो चुप नहीं रहना [Read the Rest...]
घटनाक्रम–मई 2012
सम्मान – वर्ष 2011 का डा. रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान दुर्गाप्रसाद गुप्त को देने की घोषणा। गुप्त की आलोचना दृष्टि हिंदी में आधुनिकता के एक व्यापक अर्थ की ओर इंगित करती है। केदार पीठ द्वारा दिया जानेवाला यह सम्मान समस्त आलोचनात्मक कृतित्व पर दिया जाता है। – युवा कवयित्री रजनी अनुरागी को पांचवां शीला सिद्धांतकर [Read the Rest...]
हाशिये पर खुश वामदल
भारत की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की 21वीं कांग्रेस पटना में 31 मार्च को और देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की 20वीं कांग्रेस अप्रैल के पहले पखवाड़े में केरल के कोझिकोड में समाप्त हुई। पश्चिम बंगाल में 35 साल के शासन के बाद वाममोर्चा को मिली [Read the Rest...]
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