अकाल की छाया में 50 करोड़ी तमाशा

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के “लोहियावादीÓ जन्मदिन समारोह पर, जो इस साल 20 से 22 नवंबर तक सार्वजनिक रूप से मनाया गया, कुल कितना सरकारी खर्च आया होगा? लखनऊ के राजनीतिक हलक़ों में चर्चा है कि तीन दिन के इस शाही जश्न पर, जिसने ऐसे जश्नों के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिये, सरकारी खज़़ाने से 50 करोड़ रूपये के आसपास खर्च हुआ। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि अकेले ए आर रहमान (फि़ल्म संगीतकार) को दस करोड़ रूपये दिये गये। उन्हें इस मौके पर नाच-गाने का रंगारंग कार्यक्रम पेश करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ख़ास तौर पर बुलाया था, और मुख्यमंत्री ने खु़द ए आर रहमान की अगवानी की थी। रहमान अपने साथ 300 गवैयों-साजिंदों-नचनियों की भारी-भरकम मंडली लेकर मुलायम के गांव सैफई (जि़ला इटावा) पहुंचे थे – जहां यह सात-सितारा “समाजवादीÓ समारोह हुआ। कुछ हाथियों के वजऩ के बराबर इस मंडली को हवाई जहाजों से मुंबई से सैफई ले जाने-ले आने, रूकने-ठहरने व खाने-पीने और मंडली के सदस्यों के मेहनताने का ख़र्च अलग है। (सूत्रों का कहना है कि इन मदों में कम-से-कम पांच करोड़ रूपये और ख़र्च हुए।)
विडंबना यह है कि मुलायम सिंह यादव के 76-वें जन्मदिन का यह अश्लील तमाशा तब हुआ है, जब उत्तर प्रदेश के बहुत बड़े हिस्से पर अकाल की छाया मंडरा रही है। नवंबर के उत्तरार्द्ध में सरकार को बाध्य होकर राज्य के 75 जि़लों में से 50 जि़लों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा। हक़ीक़त यह है कि बाक़ी 25 जि़ले भी इन दिनों ज़बर्दस्त सूखे की चपेट में हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी सात जि़ले किसानों की खु़दकुशी वाले इलाके़ बन गये हैं – यहां इस साल अब तक 100 से ज़्यादा किसान, सूखे से फ़सल पूरी तरह नष्ट हो जाने और कोई सरकारी सहायता न मिलने की वजह से, आत्महत्या कर चुके हैं। बुंदेलखंड इलाक़े के अख़बार जैसे किसान आत्महत्याओं के रोजऩामचा बन गये हैं।
लेकिन अखिलेश यादव सरकार इन सबसे बेपरवाह मुलायम का जन्मदिन राजसी अंदाज से मनाने में लगी रही। समूची सरकारी मशीनरी मुलायम के गांव सैफई में झोंक दी गयी – ज़्यादातर मंत्री व मुख्य सचिव से लेकर अन्य अफ़सर और कर्मचारी सैफई में डेरा डाले रहे। सैफई कहने-भर को गांव है; वह पिछले कुछ सालों में (मुलायम की कृपा और सरकारी धन वर्षा से) बड़े औद्योगिक घरानों (कारपोरेट जगत) की मनभावन स्मार्ट सिटी-जैसा बन गया है। बड़े बाज़ार, लंबी-चैड़ी-चमचमाती सड़कें, नयी-लकदक व शानदार मोटरगाडिय़ां, अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम व ऑडिटोरियम, दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआइआइएमएस) की तजऱ् पर मेडिकल संस्थान, रूकने-ठहरने के लिए आलीशान ठिकाने, बड़ा हवाई casino अड्डा … सब कुछ है यहां। सफई के हवाई अड्डे पर बड़े हवाई जहाज व हेलिकॉप्टर उतर व उड़ान भर सकते हैं। लोगों का कहना है कि सैफई का हवाई अड्डा इलाहाबाद के बमरौली हवाई अड्डे और बनारस के बाबतपुर हवाई अड्डे से ज़्यादा बड़ा है।
अपना जन्मदिन बड़े तामझाम, शाहख़र्च अंदाज़ व सरकारी धन के दुरूपयोग से मनाने की शुरूआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता मायावती ने की थी, जब वह 2007-2012 के दौरान उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। इसकी आलोचना करते हुए मुलायम व सपा ने तब उन्हें “दलित की बेटी नहीं, दौलत की बेटीÓ कहना शुरू किया था। लेकिन मुलायम ने जिस अंदाज़ में और जिस बड़े पैमाने पर सरकारी मशीनरी व धन का दुरूपयोग करते हुए अपना जन्मदिन मनाया, उसने मायावती को मीलों पीछे छोड़ दिया है। इस माने में मुलायम के आगे मायावती कहीं नहीं टिकतीं। पिछले साल भी मुलायम का 75-वां जन्मदिन ऐसे ही तड़क-भड़क व सरकारी धन की फिज़ूलख़र्ची से रामपुर में कैबिनेट मंत्री आज़म ख़ान ने मनाया था, जिसकी कड़ी निंदा हुई थी। तब दो दिन के इस कार्यक्रम के लिए इंग्लैंड से ख़ास तौर पर विक्टोरिया बग्घी खऱीद कर मंगायी गयी थी, जिस पर सवार होकर मुलायम ने रामपुर की सैर की थी। राज्य सरकार के 40 मंत्री तब रामपुर में डेरा डाले हुए थे।
और अंत में: अपने पिता मुलायम का जन्मदिन तमाशा ख़त्म होते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी बीवी और बच्चों के साथ 23 नवंबर को दो दिन के लिए मौज-मस्ती करने बांधवगढ़ नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) निकल गये – बाघ-भालू-हिरण देखने और उनकी तस्वीरें उतारने। इस तरह अखिलेश सरकार राज्य में सूखे व अकाल की स्थिति और किसानों की आत्महत्याओं से निपट रही है! इससे आगे के पेजों को देखने  लिये क्लिक करें NotNul.com

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