Various Editions of Samayantar

September 2015

  1. दमन और प्रतिशोध का दौर
  2. आंतरिक सुरक्षा का सबसे बड़ा खतरा
  3. देश में प्रताड़ना विदेश में सम्मान
  4. जनादेश के अपहरण की युक्तियां
  5. चुनावी गणित में अल्पसंख्यक
  6. मृत्युदंड के औचित्य की राजनीति
  7. मृत्युदंड की अर्थमिति
  8. भारतीय धर्मनिरपेक्षता बहुसंख्यक सांप्रदायिकता के लिए दरवाजा खोल देती है
  9. संघीयता की उलझन
  10. ‘उत्तर’ समय में स्त्री प्रतिरोध और संघर्ष की चेतना
  11. भाषा के राजनीतिक निहितार्थ
  12. मेहरबां हो के बुला लो …
  13. बाजारवाद के दौर में लेखक
  14. सोशल मीडिया की असामाजिकता

October 215

  1. संपृक्ति की कला
  2. निजीकरण के फल
  3. उनके विद्रोही स्वरों का संगीत
  4. अलविदा वीरेन दा!
  5. बाबा, आपके नाम पर
  6. सीरिया के शरणार्थी और दुनिया की सरकारें
  7. अतीत और इतिहास पर भारी वर्तमान की राजनीति
  8. नेपाल का संविधान और भारत की दुविधा
  9. भारतीय वामपंथ के लिए कॉर्बिन के मायने
  10. हिंदुत्व की जकड़ में  विश्व हिंदी   सम्मेलन
  11. सर दर्द से दांत दर्द तक
  12. जगदीश चतुर्वेदी: एक अप्रतिम साहित्यिक व्यक्तित्व
  13. सार्वजनिक विरोध का निजी चेहरा
  14. पंजाब का कृषि संकट, खुदकुशी और महिलाएं
  15. वैश्विक पूंजी और श्रम
  16. आधुनिक भारतीय जीवन का चितेरा
  17. आधुनिक सांप्रदायिकता का पौराणिक एजेंडा
  18. पतनशील सामंती समाज का लेखा
  19. भाषा और वर्चस्व की राजनीति
  20. धीमे धीमे बजते सातों समुद्र
  21. जीत की उम्मीद जगाती कविताएं
  22. संपादक का वृत्तांत
  23. जीवन की प्रासंगिकता का अर्थ
  24. सपनों के सरोकार
  25. प्रौद्योगिकी और समाज

November 2015

  1. असहिष्णुता से असहमति
  2. इन बेशर्मों को शर्म नहीं आती
  3. गलतबयानी का नमूना
  4. बस्तर में वकीलों, पत्रकारों पर हमले
  5. हत्या की पैरोकारी का चातुर्य
  6. लोकतंत्र का गुजरात मॉडल समरथ को नहीं दोस गुसांई!
  7. बर्बरता की राह
  8. वैज्ञानिक भार्गव और संघी तर्क
  9. ‘हम चंद्रमा-मंगल की सीमाओं पर थपकी दे रहे हैं लेकिन उतने ही अंधविश्वासी भी होते जा रहे हैं’
  10. लेखकों के विरोध को कलाकारों का समर्थन
  11. तुम बिल्कुल हम जैसे निकले
  12. इतिहास और वर्तमान का संबंध
  13. धंधे और शोषण का धर्मशास्त्र
  14. लोकतंत्र में न्यायिक स्वतंत्रता
  15. समान नागरिक संहिता का औचित्य
  16. साहित्य का व्यवसाय और अय्याशी के चरागाह
  17. ‘मैं कवि हूं पाया है प्रकाश’
  18. वीरेन की कविता कला पर चंद बातें
  19. लेखक-सेना ?
  20. लाखों लेखक!
  21. अपना-अपना एजेंडा
  22. रामकथा के पीछे
  23. बीस साल बाद

July -2015

  1. सांसदों की नजरों में गांव
  2. मौन का गहराता मौसम
  3. झूठ का कारोबार
  4. ‘स्वराज बजट’: नई शुरूआत
  5. बिल्ली के गले में घंटी कैसे बंधेगी?
  6. न्यायाधीशों की नियुक्ति बनाम न्यायिक स्वतंत्रता का सवाल
  7. जसोदाबेन से क्यों डरती है भाजपा
  8. अप्रभावी कृषि मूल्य नीति
  9. भारत के पानी बाजार को लेकर बेचैन दुनिया
  10. बन पाएगा संविधान!
  11. त्रासदियों का भूकंप अभी बाकी है
  12. गफलत में सुकून का उल्लास
  13. इंसाफ के बदले मुंह बंदकराई!
  14. भारतीय भौतिकवाद का विलोपीकरण
  15. अकबर बनाम राणा प्रताप
  16. जनचेतना का प्रतिबद्ध कवि
  17. आमुखः मुद्रित संस्करण से आभासी दुनिया तक की यात्रा
  18. संगीत के ग्रामोफोन-सितारे
  19. कुछ भी भूला नहीं जा सकता
  20. प्रफुल्ल बिदवई
  21. सुरेंद्र कुमार

December 2015

  1. यह धुआं कहा से उठता है!
  2. शिक्षा व सामाजिक व्यवस्था के प्रति गलत समझ का नमूना
  3. खुफिया एजेंसियांः आईएस राग का सच
  4. जमीन की लूट में सरकार की मेहरबानी
  5. ‘समर्थकों’ का यथार्थ
  6. बहादुर उरांव ने दिखाया रास्ता
  7. अकाल की छाया में 50 करोड़ी तमाशा
  8. लौट के योगी घर को आए!
  9. अध्यक्ष का वक्तव्य
  10. वहाबी संप्रदाय से आईएसआई तक
  11. पेरिस हमलों का पाखंड
  12. वर्तमान को अतीत की जरूरत
  13. मूल्यांकन क दृष्टि की सीमा
  14. टीपू को मतांध बताने की कैसे रची साज़िश!
  15. प्रतिकात्मक प्रतिरोध की ऐतिहासिक अर्थवत्ता
  16. गहराता समाजिक राजनीतिक संकट
  17. फिल्म और फलसफे का मिटता फर्क
  18. हमारे वक्त की लकीरें
  19. विरोध का विस्तार
  20. स्वायत्तता की ‘संस्कृति’
  21. वामपंथ के लिए ‘सबक’
  22. विरोध का विस्तार
  23. प्रभाव और रहस्य

August 2015

  1. समयांतर (मुद्रित संस्करण) वार्षिक ग्राहक बनने का आसान तरीका
  2. बौद्धिक दरिद्रता के वारिस
  3. तेलंगाना को अपना करमचेडू चाहिए
  4. नए माध्यम पर आस्था रखें
  5. लेखक समाज का प्रतिपक्ष कहां है?
  6. नश्वरता के परिवर्तनशील बोध का आख्यान
  7. प्रिय लेखको!
  8. अमानवीय और विवेकहीन
  9. सत्ता और विज्ञान
  10. भारत का सामाजिक-आर्थिक यथार्थ
  11. क्षेत्रीय स्वास्थ्य असंतुलन
  12. छोटी परियोजना, बड़ी त्रासदी
  13. विलुप्त होती नदी का दर्द
  14. पहाड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़
  15. आस्था क्या शांतिभंग का लाइसेंस दे देती है?
  16. व्यापमंः महाघोटाले का तांडव
  17. भ्रष्टाचार की जड़ें
  18. अविवाहित मांओं की सामाजिक स्वीकृति
  19. ग्रीक त्रासदी मात्र शुरूआत है
  20. इजराइल का युद्ध अपराध और भारत की अनुपस्थिति
  21. पवित्र जीव से राष्ट्रीय पशु तक
  22. हत्याओं की कहानियों का शीर्षक नहीं होता
  23. शहर का मौसम
  24. … हम नहीं तोड़ेंगे
  25. संपादक को सलाम
  26. अब्दुल्ला हुसैन

Jun 2015

  1. टाटा का सच
  2. हाशिमपुरा कांड और मीडिया का चेहरा
  3. विवेक और वैज्ञानिकता के ‘बुरे दिन’
  4. इंसाफ कहां है
  5. इस विवाद का अंत कहां है ?
  6. हिंदू समय में दिनकर कार्ड
  7. धर्मांतरण विवाह और रिलेशनशिप
  8. एक साल तीन टिप्पणियां
  9. भूख का अर्थशास्त्र
  10. केंद्र बनाम राज्य
  11. नर्मदा के लोगों का संघर्ष
  12. वित्तीय विमर्श और जन स्वास्थ्य
  13. संघ-भाजपा के खतरनाक मंसूबे
  14. हाशिये का हमसफर
  15. दैनंदिन जीवन की कथा
  16. जॉन नैश
  17. साहित्य और राजनीतिक यथार्थ
  18. मिथक, हिंसा और पितृसत्ता
  19. मुस्लिम महिला आत्मकथाओं में मानवाधिकार का सवाल
  20. आदिवासी, विकास और प्रतिरोध
  21. ‘कानून के शासन’ का सत्य
  22. क्रांतिकारी सपनों की दास्तान
  23. कवि नेरुदा के संस्मरणों में सदी
  24. शून्य से विराट तक
  25. एक सुखद अंत के लिए
  26. शिवाजी और धर्म
  27. अंग्रेजी से कुचला भारतीय साहित्य
  28. गपोड़िए का विमर्श
  29. रचनाकार और उसका अंतर्जगत
  30. निजी उद्यम के खतरे
  31. एक त्रासदी का दिशा संकेत
  32. बात हिंदी ग़ज़ल की
  33. बदलते यथार्थ की कहानियां
  34. लेखक की जिम्मेदारियां

May 2015

  1. कठिन है डगर…
  2. जमीन : कुछ तथ्य
  3. झूठे आंबेडकर प्रेम का विखंडन
  4. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गांवों के हालात
  5. सांप्रदायिकता की बढ़ती गिरफ्त
  6. क्या गोलरूख कांट्रेक्टर को इंसाफ मिलेगा?
  7. एक कत्लेआम, एक फैसला और हाशिमपुरा में जिंदगी के 28 वर्ष
  8. कारपोरेट का कसता शिकंजा
  9. स्वास्थ्य-नीति की सेहत
  10. लिंगभेद का नंगा नाच
  11. पगड़ी संभाल जट्टा…
  12. विभाजन की लकीरें
  13. श्रमिकों के हितों के विरुद्ध
  14. एदुआर्दो गालेआनो
  15. अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही का तलबगार लेखक
  16. जो कहा जाना चाहिए
  17. ‘समोवार’ में आखिरी चाय
  18. छोटी महत्वाकांक्षाओं से प्रदूषित : दुनिया का सबसे बड़ा शिखर
  19. नेहरू स्मारक में अवतारी
  20. लेखक कहां थे!
  21. आए दिन बहार के
  22. ‘विस्तारा’ की उड़ान

April 2015

  1. अपराधी कौन थे?
  2. इराक शिया बहुल है
  3. धर्म और राजनीति
  4. पवित्र गाय और भाजपा की सनक
  5. नकारे नेताओं की शरणस्थली
  6. सामूहिक बर्बरता का राजनीतिक- सामाजिक समीकरण
  7. वेंकटरमण रामकृष्णन ने जो कहा
  8. हाशिमपुरा न्याय की हार है
  9. ‘यह पूरे भारतीय राज्यतंत्र की असफलता है’
  10. हाशिमपुरा कांड और मीडिया
  11. सामाजिक संतुलन का सवाल
  12. कॉरपोरेट युग में नेहरूवादी बजट
  13. जनता को तंग करने वाला विधेयक
  14. आहार को नियंत्रित करने का प्रयत्न
  15. ‘महान’ का दुःस्वप्न
  16. पर्यावरण और जीवन की कीमत पर बिजली
  17. ‘विनोद’ और प्रहसन
  18. छोटे पर्दे का डर और बेपर्दा समाज
  19. साढ़े सात लाख की रहस्य कथा
  20. स्वच्छता अभियान की दुर्गंध
  21. जितेंद्र रघुवंशी

March 215

  1. आप की जीत पर वाम के लिए सबक
  2. ‘सिर्फ प्रगतिशील ही नहीं सब को साथ लेकर चलना चाहिए’
  3. ‘आप’ की शुरूआत और नई ‘आप’
  4. किसान विरोधी दमनकारी कानून
  5. कामरेड पानसरे की जघन्य हत्या और उनकी पत्नी पर भी घातक हमला लोकतंत्र पर फासीवाद के कसते शिकंजे का अंजाम
  6. हम सब पानसरे
  7. ‘ब्लैक मनी’ का ‘व्हाइट बैंक’
  8. ‘नीति’ या दुर्नीति
  9. धुआं वहीं उठता है जहां आग हो
  10. मिथक को यथार्थ मानने के खतरे
  11. धर्म परिवर्तन,घरवापसी और देशद्रोहः खतरा क्या है?
  12. सकारात्मकता समतावादी आंदोलन का आकर्षण है
  13. महिला सशक्तीकरण – नारे और यथार्थ
  14. क्या है हिमालयी नदियों का मिजाज?
  15. छोटी परियोजनाएं बड़े दावेदार
  16. हिंदी की संकटग्रस्त दुनिया
  17. तेरे मन कुछ और है ( तेरे ) प्रभु के मन कुछ और 
  18. जन्मशती जो हमने मनाई नहीं
  19. अपने अपने तुलसीराम
  20. पूर्व कवि से व्याख्यान-पुरुष तक
  21. ‘यश भारती’ की बंदरबांट

march 2015

  1. धुआं वहीं उठता है जहां आग हो

Fabruary 2015

  1. हिंदू फासीवाद के दौर में वामपंथ
  2. हिंदी प्रदेश का सामाजिक संकट
  3. कोली और न्याय व्यवस्था से जुड़े सवाल
  4. इग्नूः जांच का मतलब
  5. ईश्वर के अनुरूप काल्पनिक विज्ञान का सृजन
  6. सरकारी विज्ञापनों के जरिए राजनीति
  7. असहमति की वैधता का सवाल
  8. कुछ पद्म पुरस्कार
  9. साहित्य के धंधे में नए निवेशक
  10. अकादेमीः नियति का पूर्वाख्यान
  11. आत्ममुग्धता के प्रतिमान
  12. पुरस्कारों को भूलने का प्रसंग
  13. रजनी कोठारी
  14. धर्म और राजनीति के अंतरसंबंध
  15. धर्म, आधुनिकता और धर्मनिरपेक्षता
  16. धर्मनिरपेक्षीकरण की पड़ताल
  17. ‘इतिहासकारों को खास नियमों और कायदों के मुताबिक चलना होता है’
  18. धर्म और धर्मनिरपेक्षता के बीच बटा हिंसा का इतिहास
  19. हिंदू फासीवाद के दौर में वामपंथ
  20. गुजरात में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का निर्माण
  21. प्रतीक की राजनीति में गाय
  22. हिंदू घर में झगड़ा भारी
  23. ‘लव जिहाद : एक सांप्रदायिक फैंटेसी
  24. वृहत्तर सीरिया में धर्म और राजनीति
  25. बहुसंख्यकवादी ताकतों का उभार
  26. धर्म, पूंजी और साम्राज्य का गठबंधन
  27. अर्थशास्त्र की धार्मिकता
  28. दंगों का राजनीतिक अर्थशास्त्र
  29. संघ का यथार्थ
  30. मिली-जुली सांस्कृतिक परंपराओं को खत्म करने की साजिश
  31. सांप्रदायिकता में छिपा जातिशास्त्र
  32. शिक्षा के गैर-आधुनिक अंतरविरोध
  33. एकता, अलगाव और संघर्ष

January-2015

  1. बदले संदर्भों की चुनौतियां और लेखक
  2. असहमति का सम्मान करने का स्वांग
  3. ‘घर वापसी’: हिंदू धर्म के नरक में आपका स्वागत है
  4. ‘स्वच्छता अभियान’ जारी है
  5. निठारी में अपराध–ईपीडबल्यूबी का संपादकीय
  6. मेक इन इंडियाः पर खरीदेगा कौन?
  7. उच्च शिक्षा की उलटबांसी
  8. संसदीय राजनीति और दलित नेतृत्व के सवाल
  9. सुकरात के वारिस
  10. राष्ट्रीय ग्रंथ का महातम्य
  11. असम में नरसंहार
  12. मानवाधिकार और यौनकर्मी
  13. वामपंथ की सीमाएं क्या हैं?
  14. सत्ता साहित्य और समाज
  15. समकालीन हिंदी कविताः कुछ नोट्स
  16. ग्रेनेडा में अपराध हो रहा था
  17. रंग बदलते पहाड़
  18. ‘संस्कृति’ की कुसंस्कृति

December

  1. प्रभाव और रहस्य

December 2014

  1. सीकरीवासी संतों के नाम
  2. धर्म: शास्त्र और शस्त्र का रिश्ता
  3. हम मृत्युदंड का विरोध करते हैं!
  4. एक ‘राजद्रोही’ की चिट्ठी
  5. फुले-अंबेडकर का महाराष्ट्र
  6. ‘कोली को फांसी न्याय का मखौल होगी’
  7. मनरेगा का अर्थशास्त्र
  8. ए.एम.यू. की अजीब दास्तान
  9. विश्वसनीयता का संकट
  10. ‘अच्छे दिनों’ की एक और तस्वीर
  11. जनसंख्या नियोजन के नाम चढ़ी बलियां
  12. गलत नीतियों का परिणाम
  13. मोदी, मौत और मुर्रीबंदी
  14. संस्कृत बनाम जर्मन
  15. उर्दू से बैर कैसा!
  16. रसमय रूमानियत की अदाकारा
  17. समकालीन कला का दर्शन और मनोविज्ञान
  18. नई सदी में कविता
  19. सरकारी विज्ञापन कुछ नियम तो हों !
  20. आधुनिक कला के संघर्ष का आख्यान
  21. चिकित्साशास्त्र की विकास यात्रा
  22. सीकरीवासी संतों के नाम
  23. अनवार रिज़वी

November 2014

  1. नो, प्राइम मिनिस्टर !
  2. गायब होते बच्चे, मानव अंगों का व्यापार और एक सजा-ए-मौत
  3. बाजार का शास्त्र
  4. शांति पर किसके हित में
  5. आर्थिक असमानता का बढ़ता दायरा
  6. चुनाव से चुनाव तक का सत्य
  7. हैम्लेट में हैदर
  8. स्मृति की भूल-भुलैया
  9. ‘हर तरफ खाक उड़ाएगी सबा मेरे बाद’
  10. चाहिए आज के बतिस्ताओं के विरुद्ध एक और मुक्ति युद्ध
  11. प्रसार भारती जिसे सभी सरकारों ने दुहा
  12. को नृप होय…
  13. किसे नहीं चाहिए भ्रष्टाचार!
  14. बिना जातियां का खात्मा किए स्वच्छ भारत नामुमकिन
  15. सुरेंद्र कोली की फांसी से उठे कुछ सवाल

October 2014

  1. लोक रुचि साहित्य की रहस्य कथा
  2. दिव्या और काव्या बचाएंगी सिंधु घाटी सभ्यता को
  3. बहुलतावादी संस्कृति का गवाह
  4. भाजपा का कारोबार
  5. वर्तमान परिदृश्य में पटवर्धन की फिल्में
  6. नवउदारवादी व्यवस्था की देन इबोला
  7. उदार और कट्टर इस्लाम के बीच की लड़ाई
  8. अंतरराष्ट्रीयता और स्थानिकता के खिलाफ अभियान
  9. कहानीः वैचारिक पक्ष का महत्व
  10. नवारुण दाः जैसा हमने जाना
  11. मोदी की बूम पुराणों की धूम
  12. जातिभेद और वामपंथ के बीच की यात्रा
  13. मुक्तिबोधः याद करने की मजबूरी
  14. खत्म हो चुके हैं खतरे सारे
  15. भारतीय यहूदीः पहचान का संकट
  16. आंचलिक ऐतिहासिकता में रचा आख्यान
  17. सौंदर्यबोध के नाटककार रवींद्रनाथ ठाकुर
  18.  फासीवादी सौंदर्यबोध का साम्यवादी उत्तर
  19. अंतर्जगत का सच जानने वाली यात्रा    
  20. उर्फ हिंदी समाज में अनुपस्थित इनरुवा लाटा
  21. बाजार में मारकेज की याद

september 2014

  1. ‘लोक सेवा’ बरास्ता अंग्रेजी
  2. एक दीप बुझ गया…
  3. बेताल फिर उसी डाल पर
  4. न्यायाधीशः न्यायालयों के बाहर और भीतर
  5. ‘लव जिहाद’ का जातीय समाजशास्त्र
  6. क्रोनी पूंजीवाद का नया प्रिंस
  7. सहारनपुर : दंगे क्यों हुए
  8. क्या! अंगे्रजी नहीं बोलते!
  9. सहयोग का नया व्याकरणः नया विकास बैंक
  10. पुण्य भूमि के वध स्थल
  11. बलात्कारी घोषित करती लिंग भेदी नैतिकता
  12. इसराइल को सिर्फ ताकत की जुबान ही समझ में आती हैः श्लोमो जैंड
  13. इतिहास की कैद में फंसा भविष्य
  14. ‘मैं आखिरी सांस तक लड़ूंगा’
  15. अनिश्चितता का द्वंद्व
  16. फलस्तीनी  चार कावताए कविता
  17. यशपाल का साहित्य चिंतन
  18. ट्राई की कोशिशः पर सिफारिशें मानेगा कौन
  19. इस भरी दुनिया में…
  20. बाजीगरी वृत्तांत
  21. राजनीति के रंग

August 2014

  1. कुल्ला करने के तरीके का पेटेंट
  2. यह जो तस्वीर उभर रही है…
  3. मनोरमा देवी की याद में
  4. मोदी का भगवा नवउदारवाद
  5. गैस की गर्मी सत्ता का जोश
  6. इसराइल का तांडव
  7.   गरीबी बनाम आकड़ों का खेल
  8. शरीयत अदालतों पर सर्वोच्च न्यायालय
  9. बालिग हवस और नाबालिग अपराधी
  10. गति और दुर्गति
  11. भारतीय भाषाओं का सवाल
  12. भारतीय इतिहास का बत्रा युग
  13. गंगा पहाड़ों से नीचे आएगी भी ?
  14. ये कैसे श्रम सुधार हैं
  15. शोषण-उत्पीड़न का इतिवृत्त और एक फैसला
  16. हर तस्वीर की कहानी होती है
  17. अब अंबानी का मीडिया
  18. ट्रैक टू डिप्लोमेसी के दो नंबरी किरदार

July 2014

  1. कौन बनेगा कुलाधिपति ?
  2. ‘जो आगे नहीं बढ़ता पीछे सरक जाता है’
  3. हिन्दी : राजनीति और यथार्थ के छोर
  4. इतिहास मरता नहीं है
  5. और भी इम्तिहान बाकी हैं
  6. मेँ अपने देश की बात कर रही हूं
  7. यह है कानून का राज ?
  8. महिलाओं के बुनियादी नागरिक अधिकार का सवाल
  9. क्या रेलवे को बचाया जा सकता
  10. सरदार सरोवर : जो डूबेंगे उनका क्या होगा
  11. आदिवासियों की कीमत पर ‘विकास’
  12. भारतीय चुनाव व्यवस्था की सीमाएं
  13. नवउदारवाद : एक पुनर्वचान
  14. कपास के फूल
  15. ओ पृथ्वी तुम्हारा घर कहां है
  16. कविता ओर सीकरी के बीच
  17. काव्य का जनतांत्रीकरण
  18. हास्य – व्यंग्य का वीक्षोभ काल
  19. विझापनों का राजनीतिकरण
  20. फ्रांसीसी कविता के विविध रंग

june 2014

  1. मार्क्स की वापसी ?
  2. बहस जनसमुदाय के बीच होनी चाहिए
  3. दूसरा पत्र
  4. भविष्य के पूर्व संकेत
  5. असुरक्षा से अनिश्चितता तक
  6. कविता का प्रतिरोधी तानाबाना
  7. विकास का विरूपित चेहरा
  8. क्रोध, आकांक्षा और आशंका
  9. मतदान से खतरा
  10. जीएन साईबाबा की गिरफ्तारी से उठे सवाल
  11. भगाणा बलात्कार कांड : कुछ सवाल
  12. माता बनाम स्त्री
  13. दुर्लभ होते दूध की दास्तान
  14. भगवा उभार के बहाने
  15. ‘भारत नाजीवाद के कगार पर’
  16. उपभोक्ता लोकतंत्र की ओर
  17. अल्पसंख्यक कहां हैं ?
  18. उ. प्रः भाजपा कैसे जीती
  19. हमारे अपने मेफिस्टोफिसिल
  20. आम चुनाव का खास रंग
  21. कुछ छवियां कुछ नोट्स
  22. एक अनोखा व्यक्तित्वः गौहर जान
  23. मुकुल सिन्हा
  24. साहित्यक पत्रिकाएँ : अस्तित्ववादी संकट
  25. परिवर्तन की लहर
  26. विकसित देशों का अजेंडा
  27. चाणक्य का बाजारवाद
  28. मार्क्स की वापसी ?
  29. लोक गीतों की तलाश में
  30. अपनी परिधि में सिकुड़ता लेखक
  31. टैगोर एक और चेहरा
  32. एक डाक्टर की अमर कहानी
  33. समकालीन फ्रेंच कविता और उसका विधान
  34. आगे का रास्ता

May 2014

  1. ‘आप का मुखपत्र
  2. सरोकार और पक्षधरता के सवाल
  3. प्रयास का अभिनंदन
  4. ग्रेबियल गार्सिया मारकेज
  5. क्रोनि पूंजीवाद की लहर 
  6. कानून के बाद
  7. घोषणापत्र के अघोषित सत्य
  8. मीडिया की लहर मे दबी सच की इबारतें
  9. घातक बनता बहुराष्ट्रीय कंपनियों का चंदा
  10. काले धन की अर्थव्यवस्था
  11. इस्लामिक आतंकवाद किसकी देन है ?
  12. क्या महज वोट बैंक हैं मुसलमान ?
  13. जलवायु परिवर्तन के बड़े खतरे
  14. मजदूरों के संघर्ष की गाथा
  15. अमेरिका में मजदूर और मजदूरी
  16. नव उदरवाद के दौर में स्वास्थ
  17. क्या अविवाहित होना कोई अतरिक्त गुण है?
  18. कितनी सुरक्षित होगी चारधाम यात्रा ?
  19. लोकतंत्र : सिमटते विकल्प

April 2014

  1. ब्रह्मचर्य नैतिकता और राष्ट्रवाद
  2. क्रोनी पूंजीवाद और सांप्रदायिकता का गठबंधन
  3. घटनाक्रम
  4. मीडिया की जांच क्यों न हो!
  5. दंगों की राजनीति : आतंकवाद का तड़का
  6. गुजरात का ‘विकास मॉडल’
  7. कॉरपोरेट, मोदी, गुजरात और कांग्रेस
  8. कल्‍याणकारी राज्य की चुनौतियां
  9. माणिक सरकार को आप कितना जानते हैं?
  10. गुजरात के विकास का यथार्थ

March 2014

  1. लोकतंत्र : विज्ञापन के द्वंद्व में गैस का धुआं

February 2014

  1. जाति उन्मूलन : इतिहास वर्तमान और भविष्य
  2. लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्‍यों का संघर्ष
  3. घटनाक्रम- फरवरी 2014
  4. निधन : नामदेव ढसाल
  5. दिल्‍ली मेल : हिंदी प्रदेश के सत्‍ताधारी और साहित्‍य
  6. अपसंस्‍कृति की संस्‍कृति
  7. पत्रकारों पर बढ़ता दबाव
  8. अमर्त्‍य सेन की देवी और इच्‍छाओं का अश्‍व
  9. शोषण के लिए अभिशप्‍त मजदूर
  10. तस्‍वीर के पर्दे में : मुजफ्फरनगर-राहत शिविरों से लौटकर
  11. भूमि अधिग्रहण कानून : एक सदी बाद का बदलाव और सार्थकता के सवाल
  12. दिल्‍ली : केंद्र बनाम राज्‍य
  13. सरकारों और कारपोरेशनों द्वारा नागरिकों की निगरानी बंद हो!
  14. पत्र : पुरुष दंभ का प्रदर्शन
  15. संपादकीय : अभिव्‍यक्ति : किसकी स्‍वतंत्रता?

January 2014

  1. दिल्‍ली मेल : खुले मंच के दर्शन की परिणति
  2. घटनाक्रम : जनवरी 2014
  3. बहस : दलित समाज और जूठन
  4. सिनेमा की स्‍त्री और समाज का यथार्थ
  5. मूर्ति मीडिया और मोदी
  6. मीडिया : दुर्घटना के समाचार के बहाने
  7. बहस : अक्‍टूबर क्रांति और हिंदी का बौद्धिक विमर्श
  8. समाज : कहां गईं बेटियां
  9. कृषि : आत्‍महत्‍या की खेती
  10. मूर्तिपूजा : मूर्तियों की राजनीति
  11. कार्पोरेट जगत : क्‍या सहारा बच निकलेगा?
  12. अर्थव्‍यवस्‍था : भारत में भोजन का भूगोल
  13. ‘स्‍नूपिंग’ कथा
  14. दिल्‍ली राज्‍य चुनाव में वाम : कुनबा डूबा तो डूबा क्‍यो?
  15. उत्‍तराखंड के लिए मोदी का विकास-मंत्र
  16. मंच : उत्‍तराखंड में बाढ़ विनाश और बांधों की भूमिका पर लघु फिल्‍म
  17. संपादकीय : ‘आप’ यानी सत्ता का ‘कोर्स करेक्शन’
  18. पत्र : बधाई!

December 2013

  1. राजनीति: नमो का स्वाहा!
  2. संस्मरण : असहमति के सहयात्री
  3. घटनाक्रम – दिसंबर 2013
  4. निधन : ओमप्रकाश वाल्मीकि
  5. साहित्य – पटना : कविता का रागदरबारी
  6. राजनीतिक आर्थिक व्यवस्था का आख्यान
  7. मीडिया : गैरजिम्मेदारी के खोल में समाया ओपीनियन पोल
  8. घरेलू कामगार हिंसा का जाल
  9. शिक्षा :बदलेंगे चित्र तो बदलेगा मानस
  10. भारत रत्न : हम भी पुकारते हैं: सचिन सचिन
  11. अलोकतांत्रिक नेतृत्व: जसम की दिल्ली इकाई की पूर्व सचिव भाषा सिंह का खुला पत्र
  12. आर्थिक-राजनीति : हड़पी जा रही है खेती की जमीन
  13. ‘आप’ का चेहरा
  14. साक्षात्कार: ‘जो सीमाएं मुझे दी गई हैं मैं उनके पार जाना चाहता हूं!’
  15. नेपाल चुनाव : क्यों मात खा गए माओवादी?
  16. संपादकीय : रास लीला, राम लीला और ‘न्याय लीला’
  17. कहां है वह साहस?
  18. वामपंथः तथ्य कुछ और हैं
  19. पत्र :वक्त के आइने में

November 2013

  1. निधन : रामलाल धूरिया
  2. घटनाऐं – नवंबर 2013
  3. मुजफ्फरनगर : सांप्रदायिक दंगे और अखबारों की भूमिकाः एक पड़ताल
  4. भूगर्भ विज्ञान : आहत हिमालय, उग्र नदियां और मानवीय हस्तक्षेप
  5. संस्मरण : जनेवि जाति और जीवन संघर्षः कुछ नोट्स
  6. सांप्रदायिकीकरण की राजनीति
  7. दिल्ली मेल : शारीरिक बनाम मानसिक रुग्णता
  8. तथ्यों को मरोड़ने की कहानी
  9. संस्मरण : दिएन बिएन फू का युद्ध
  10. नेपाल : चुनाव भंवर में फंसी राजनीति
  11. श्रद्धांजलि : जनरल जियाप
  12. राजनीति : क्यों दक्षिणपंथ से ज्यादा विभाजित है वामपंथ?
  13. न्याय व्यवस्था : जनसंहार की राजनीति और प्रतिरोध
  14. राजनीति : कारपोरेट जगत को मोदी क्यों चाहिए
  15. पत्र : नारी मुक्ति बनाम नारी देह मुक्ति
  16. समानांतर मत : क्या भाजपा का पैसा कांग्रेस के पैसे को पीट देगा?
  17. संपादकीय : रूढ़िवादिता के गुहर में धकेला जाता समाज

October 2013

  1. परंपरागत विधा : दास्ताने किस्सागोई
  2. साक्षात्‍कार : पुरुषों के लेखन में इस्लाम की संस्कृति व जिंदगी का चित्रण है लेकिन स्त्रियों की दुनिया के बारे में कुछ नहीं है
  3. विडंबना और अंतरविरोधों का कोलाज
  4. आए थे हरिभजन को, ओटन लगे कपास
  5. लेख : “अंधेरे में” पर पुनर्विचार
  6. मानव अधिकारों से परिचय
  7. पर्यावरण : आस्था पर हावी अर्थ
  8. विज्ञान: वैज्ञानिक चेतना की जरूरत
  9. फिल्‍म : ऑस्कर अवार्ड्स: अमेरिकी नवउपनिवेश का विस्तार
  10. पानी के लिए संघर्ष की गाथा
  11. विस्थापन के दंश का शिगाफ
  12. अमानवीय मूल्यों का खंडन
  13. यह जंगल कहां निकलता है
  14. आत्‍मकथा: दर्द की दास्तान: कुछ आप बीती, कुछ जग बीती
  15. मुक्ति की छटपटाहट का दस्तावेज
  16. विकृत होती खुशी का आख्यान
  17. नैनीताल का सत्य
  18. प्रेमचंद का अध्ययन अवश्य करें, लेकिन कैसे?
  19. जीवन और समाज के आयामों पर चिंतन
  20. समग्र गुलामी का व्यवस्था-तंत्र
  21. गांधी:एक वांछित किंतु असंभव संभावना!
  22. साम्राज्यवादी नीतियों का नतीजा है वित्तीय महासंकट
  23. कोसंबी पर भगवा हमला
  24. चुनाव सुधार की बढ़ती जरूरत
  25. विज्ञापनों की राजनीति
  26. संत-पंथ और अपराध के अंधेरे कोने
  27. अनंतमूर्ति का बयान और उसके विरोधों के निहितार्थ
  28. झूठ और अज्ञान का दुस्साहस
  29. संपादकीय : दंगों का लोकतंत्र
  30. प्रकाशकीय 15वें वर्ष में प्रवेश
  31. बदस्तूर जारी है म.प्र. में शिक्षा का भगवाकरण
  32. कॉरपोरेट पॉलिटिक्स की नई बानगी
  33. आडवाणी की सांप्रदायिक राजनीति का ही विस्तार हैं मोदी
  34. चरण सिंह का ‘सेक्युलरिज्म’
  35. हिंसा-प्रतिहिंसा के राजनैतिक समीकरण

September 2013

  1. क्रोनी पूंजीवाद का नया प्रिंस
  2. विवाद : अभिव्‍यक्ति और स्‍वतंत्रता के पाखंड
  3. फिल्‍म समीक्षा : सामाजिक बदलाव की सीधी लकीर और कुछ जमीनी खतरे
  4. साक्षात्‍कार : ‘लोकतंत्र का अर्थ बदलने लगा है’
  5. ताकतवर चैनलों का कमजोर पक्ष
  6. व्‍यक्तित्‍व: आम्‍ही सगले दाभोलकर!
  7. कत्‍लेआम की सुबह
  8. दिल्‍ली मेल : खेल भावना और साहित्‍य की कामना
  9. घटनाक्रम: सितंबर 2013
  10. मिले सुर मेरा तुम्‍हारा…
  11. नेपाल : कहीं कोई रास्‍ता है?
  12. उत्‍तराखंड : खनन माफिया और सत्‍ता का गठजोड़
  13. उत्‍तर प्रदेश : ध्रुवीकरण का खतरनाक खेल
  14. गोरखालैंड आंदोलन : संघर्ष जारी है
  15. तेलंगाना : छोटे राज्‍य का बड़ा गणित
  16. आंकड़ों में अमीरी जमीन पर गरीबी
  17. अर्थव्‍यवस्‍था : उधार की विकास नीति का संकट
  18. हेम की गिरफ्तारी के बहाने
  19. एकाधिकार पर खतरे से डरी हुई पितृसत्‍ता
  20. उत्‍तराखंड में बांध : सर्वोच्‍च न्‍यायालय का आदेश
  21. समानांतर मत : खाद्य सुरक्षा बिल को दोष न दें
  22. संपादकीय : भाषा और राजनीति

August 2013

  1. घटनाक्रम – अ‍गस्त 2013
  2. सार्वजनिक जगहें : शीशे के घर के पत्‍थरबाज
  3. हीरक जयंति : जीवन और कला के अटूट संबंध
  4. भाषा : श्‍यामरुद्र पाठक का अपराध
  5. समाचारपत्र : कीमत कौन चुकाएगा?
  6. चिकित्सा सेवाएं : दो डाक्‍टरों की एक कहानी
  7. व्याख्यान : ‘मैं अपने लिए नहीं बोल रही हूं’
  8. व्यक्ति स्वतंत्र्य बनाम राज्य : ‘मैंने वह किया जो उचित मानता हूं’
  9. ट्रेवॉन मार्टिन और अमेरिकी नस्‍लवाद
  10. राजतंत्र : फर्जी मुठभेड़ों से संविधानेत्‍तर अस्तित्‍व तक
  11. खाद्य सुरक्षा बिल से कौन डरता है?
  12. राजनीति : भाषायी आड़ की सीमाएं
  13. धार्मिक पर्यटन राजनीति और अन्‍य सवाल
  14. आस्था : इंसानों से घिरा भगवान और कुछ सवाल
  15. हाशिए से : चर्चा आफत की या रावत की
  16. लूट तंत्र के हितों का सवाल
  17. गोष्ठी : उत्तराखंड बचाने की चुनौतियां
  18. जलविद्युत परियोजनाएं और आपदा : उत्‍तराखंड में बांध
  19. ‘उत्‍तराखंड में आपदा बढ़ाने में जल-विद्युत परियोजनाओं की भूमिका की स्‍वतंत्र जांच हो’
  20. संपादकीय : विदेशी निवेश का असली चेहरा
  21. पत्र : पर क्‍या इज्‍जत हिंदी वाले को मिलेगी?

July 2013

  1. सांप्रदायिकता :मल्लेश्वरम या हुबली : कर्नाटक में हिंदुत्व आतंक
  2. श्रद्धांजलि : शिवकुमार मिश्र
  3. जन्मशती : शब्द बनाम दृश्य
  4. दिल्ली मेल : एक कवि की रचना और उसका अधूरा सपना
  5. सार्वजनिक जगहें : ताला फिर खुला…
  6. स्तब्धता से दो-चार होते चित्र
  7. जन्मशती : एक बागी की याद
  8. पहाड़ों और नदियों के मिजाज को समझिये
  9. लूट तंत्र के राजा-महाराजा: कॉरपोरेट जगत के तीन चेहरे और उनका यथार्थ
  10. अर्थजगत/पृष्ठभूमि : वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीय पूंजी की भूमिका
  11. ‘मारुति सुजूकी द्वारा मजदूरों के अधिकारों का हनन’
  12. मजदूर आंदोलन: मारुति की कहानी मजदूर की जुबानी
  13. संपादकीय : ‘दैवीय आपदा’ का दानवीय सच
  14. जासूसी : कानून के मुंह पर अमेरिकी तमाचा
  15. माओवादः कुछ सवाल
  16. पत्र : व्यावसायिकता और रचनात्मकता पूरक हैं

June 2013

  1. यात्रा : देस में परदेस : बरास्ता लाहौर
  2. नोबेल व्याख्यान : कथा वाचक (Storytellers)
  3. कविता का आठवां दशक
  4. अलक्षित प्रतिरोध की पुनर्रचना
  5. इतिहास : भारत का आरंभिक इतिहास और डी.डी. कोसंबी की विरासत
  6. ‘स्थानीयकरण’ की दुहाई के निहितार्थ
  7. उपन्यास : पत्थरीले हिंदी उपन्यास पर नई दूर्वा
  8. राजनीति/अंग्रेजी : आदिवासियों की पीड़ाओं और प्रतिरोधों का आख्यान
  9. एक शहर बनने की कथा
  10. कला : पत्रों के आइने में अमृता
  11. एक अंतरंग समाज की पुनर्रचना
  12. जीवनी : मार्क्‍स की प्रासंगिकता के सवाल
  13. जीवनी और आत्मकथा : भारत की इजाडोरा
  14. स्वायत्ता का दमन और न्याय की मांग
  15. श्रृद्धांजलि : असगर अली इंजीनियर
  16. स्मरण : एक पत्र
  17. घटनाक्रम : जून 2013
  18. दिल्ली मेल : अवैध और असंवैधानिक
  19. मीडिया : नियंत्रण बनाम नियमन
  20. विवाद : आईए सी.आइ.ए.
  21. जन्मशती : अमृता शेरगिल और स्त्री अस्मिता की छवियां
  22. मजदूर आंदोलन : ऐतिहासिक हड़ताल के 55 साल
  23. कोरियाई प्रायद्वीप का संकट और अमेरिकी भूमिका
  24. विचार : राहुल गांधी : कौन बनेगा प्रधान मंत्री?
  25. समाचार-संदर्भ : हिंसा और राजनीति
  26. मंच : पाबना में दलित उत्पीड़न
  27. पत्र :सोचनीय सबक
  28. संपादकीय : भाषा और वर्चस्व

May 2013

  1. घटनाक्रम–मई 2013
  2. साक्षात्कार : ‘मैं अपने आसपास के लोगों से गहरे रूप में जुड़ा हूं!’
  3. श्रृद्धांजलि : विरोध करनेवाला संयमी लेखक
  4. अर्थव्यवस्था-दो : विकास के बहाने विलास के खतरे
  5. मीडिया : समाचार, विज्ञापन और चिट फंड की नैतिकता
  6. घटनाक्रम : मई 2013
  7. दिल्ली मेल : बहिष्कार की शुरूआत
  8. यात्रा : देस में परदेस
  9. बांग्लादेश : सिनेमा समाज और सियासत
  10. बांग्लादेशी जन उभार और भारत की मुर्दा शांति
  11. व्यावसायिकता और रचनात्मकता का द्वंद्व
  12. स्मरण : मानवीय संघर्ष और संवेदना का चितेरा बलराज साहनी
  13. बलात्कार की पाशविकता
  14. संघर्ष-गाथा : ‘मैं अपने जीवन के लिए लड़ी और जीती ’
  15. राजनीति : प्रचारतंत्र की बैसाखी का पुतला
  16. उत्तराखंड : कोका कोला का अगला शिकार
  17. संपादकीय : बलात्कार , मजदूर और चिट-फंड
  18. दिल्ली विश्वविद्यालय : ‘अंदर का कायर तो टूटे!’

April 2013

  1. पैसे के लोकतंत्र में पैसे की खबरें
  2. ऑस्कर पुरस्कार : विदेश नीति के हथियार
  3. निधन : सधुक्कड़ी का कलाकारः गणेश पाईन
  4. व्यक्तित्व : अमर रहें चावेज
  5. न्याय के लिए हमारे साथ एकजुट हों
  6. मंच : लेखकों का पत्र प्रकाशकों के नाम
  7. त्रिपुरा विधान सभा चुनाव विश्लेषण
  8. ‘माओवाद, गांधीवाद और आंबेडकरवाद को मिलकर आगे बढ़ना होगा’
  9. उत्तराखंड : शिक्षा के निजीकरण की ओर
  10. जाना वेनेजुएला के क्रांतिदूत का
  11. सांप्रदायिकता-दो : जहर उगलो, महासचिव बनो!
  12. उत्तराखंड : जमीनः लूट की ताक में सरकार
  13. आंबेडकर पर रामविलास शर्मा
  14. दिल्ली विश्वविद्यालय : मुनाफे का अंतरराष्ट्रीयकरण
  15. राजनीति और मीडिया : बिहार में मीडिया का यथार्थ
  16. सांप्रदायिकता : श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट का क्या होगा?
  17. दिल्ली मेल : काफी हाउस में राजेन्द्र यादव और होली
  18. महिला उत्पीडऩ : देश का शासक कौन है जनप्रतिनिधि या सेना
  19. पत्र : अपने दृष्टिकोण को और विस्तार दें
  20. संपादकीय : तीसरी दुनिया के लिए चावेज का अर्थ
  21. अशोक होटल में भात
  22. दवा का जहर : पश्चिमी दवा कंपनियों का तांडव और उसे रोकने का संघर्ष क्या जारी रह पाएगा?

March 2013

  1. शताब्दी वर्ष : पसमंजर : सआदत हसन मंटो
  2. घटनाक्रम – मार्च 2013
  3. साहित्य अकादेमी : हिंदी का गौरव काल ?
  4. ‘परमाणु संपन्न होने के बाद दोनों देश और भी असुरक्षित हो गए हैं’
  5. परमाणु ऊर्जा का सच
  6. फिल्म : सिलुलॉयड मैन को सलाम
  7. दोहा सम्मेलन और उसके बाद : जलवायु परिवर्तनः चिंता किसे है
  8. गैरमुनासिब फांसी
  9. सांप्रदायिकता धुले: एक दंगे की कहानी
  10. पूंजीवाद का संकट और मार्क्‍सवाद की चुनौतियां
  11. संस्मरण : एक साक्षात्कार की कहानी
  12. मिस्र में राजनीतिक परिवर्तन और लेखक
  13. पुस्तक समीक्षा : स्वराज क्यों और कैसे
  14. दिल्ली मेल : हास्य-युग की हंसी
  15. सहारा समूहः बिल्ली के गले में घंटी बंधेगी ?
  16. पत्र : ‘बेहतर’ तो और भी कुछ होता
  17. ओलंपिक खेल : कुश्ती की राजनीति
  18. कैटरीना और क्रिकेट में मस्त मुख्यमंत्री!
  19. उत्तराखंड : बढ़ती सांप्रदायिकता और कश्मीरी छात्र
  20. मंच: बिजनौर से बैनेटकोलमैन
  21. संपादकीय

February 2013

  1. लातिन अमेरिका : विचारधारा नहीं, आर्थिक प्रयोगों का समाजवाद
  2. तीसरी दुनिया के लिए शावेज का महत्व
  3. घटनाक्रम : फरवरी 2013
  4. मीडिया राष्ट्रीयता और पंजीवाद
  5. पुस्तकांश : प्रतिरोध और जागरण का आगमन
  6. भारत का अंधेरा
  7. ऊंची विकास दर का मिथक
  8. पूंजी का संकट और समाजवादी प्रयोग
  9. वामपंथ ने जेंडर के सवाल को पूरी तरह छोड़ दिया
  10. अस्मिता की लड़ाई और वाम
  11. अस्मिता की राजनीति असली संघर्षों से ध्यान बंटाती है
  12. मार्क्‍सवाद की प्रासंगिकता और पुनर्रचना
  13. ऑक्युपाई आंदोलन के निहितार्थ
  14. भटकाव का शिकार है माकपा नेतृत्व
  15. पर्यावरणीय असंतुलन मुनाफे की देन
  16. क्या विकास पूरा हो चुका है?
  17. ‘जमीनहीन अस्थायी मजदूर या जो शहरी गरीब हैं वे राजनीतिक विमर्श से बाहर हैं’
  18. पूंजीवाद के अंतरविरोध और मौजूदा संकट
  19. असंभव समय से सामना
  20. सिद्धांत और व्यवहार
  21. अतिथि संपादकीय : पूंजीवाद के बरक्स समाजवाद का सपना
  22. निधन : सूचना के अधिकार का योद्धा
  23. लेख : समाजवाद नए समाज की मांग करता है
  24. फिल्म : खुरदुरे हाथ
  25. पत्र : स्वामी नित्यानंद सरस्वती
  26. जसम फिर अज्ञेय-भक्तों के हवाले!
  27. इग्नू में भ्रष्टाचार–3 : नियुक्तियों की धांधली
  28. मैक्सिको शहर में मॉल
  29. नए वाम की संभावना
  30. व्यापक संयुक्त मोर्चे की जरूरत
  31. पाकिस्तान : सूफीवादी का रहस्य
  32. मंच : बिखरते समुदाय, विभाजित स्कूल और बिचौलिया राज्य
  33. दिल्ली मेल : लिट फेस्टिवों की भरमार
  34. संपादकीय : महत्वपूर्ण सिफारिशें

January 2013

  1. लोक साहित्य /कविता : ताकि मुट्ठी बंधी रहे
  2. कविता और समाज : लोकगायक का स्वर और आतंकित सत्ता का विष वमन
  3. फिल्म : चक्रव्यूह में फंसे आदिवासी
  4. अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह : इस सैरगाह से दूर नया घर बनाइए
  5. भारत के कॉरपोरेट संपादक और ब्रिटेन की लेवसन रिपोर्ट
  6. एक दूब का पाश
  7. भारतीय विचारधाराः मिथक से यथार्थ की ओर
  8. अमरीकी प्रतिसंस्कृति के चौराहे पर खड़ा संगीतकार
  9. श्रद्धांजलि : ध्वनियों और श्रव्य संरचना का संधान
  10. समयांतर और संन्यासी
  11. घटनाक्रम–जनवरी 2013
  12. दिल्ली मेल : गुरुओं का गुरुत्वाकषर्ण
  13. परिदृश्य : संवेदनहीन समाज में औरत
  14. उत्तराखंड : आओ राजधानी- राजधानी खेलें
  15. सत्ता और स्त्री : लोकतंत्र और बलात्कार का रूपक
  16. बलात्कारी संस्कृति, पितृसत्ता और राज सत्ता
  17. स्त्री और समाज : बलात्कार अभी नहीं थमेंगे …!
  18. भारत विभाजन क्यों हुआ?
  19. वालमार्ट में बढ़ता श्रमिक संघर्ष
  20. बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मतलब
  21. मंच : दुआ
  22. संपादकीय : दिल्ली दूरस्त
  23. पत्र : मीडिया के अनाचार की कहानी
  24. राजेन्द्र यादव के साथ बदसलूकी की भर्त्‍सना

December 2012

  1. दिल्ली मेल : कौन बनेगा अकादेमी पति
  2. लोक से दूर होती संस्कृति
  3. फैजाबाद के दंगे में मीडिया की भूमिका
  4. मीडिया : पत्रकारों को हत्यारा किसने बनाया?
  5. श्रीलाल शुक्ल सम्मान : सम्मान ऐसे ही किया जाता हैं?
  6. समीक्षा : लखनवी छोरा
  7. विवाद : विद्वेष भरी विद्वता
  8. लेख : रंगभेद की पहली सीख
  9. महबूबा था कैसे लिखूं : सत्ता-राजनीति, पुलिस और कविता
  10. डूरंड रेखा : उपराष्ट्रीयताओं का सवाल
  11. झारखंड नहीं लूटखंड है यह प्रदेश
  12. हरियाणा : माओवाद के नाम पर दलितों और भूमिहीनों का दमन
  13. जटिल है जाति का तंत्र
  14. बाल ठाकरे : प्रामाणिक भारतीय फासीवाद
  15. क्या हम क्षमा सावंत को जानते हैं ?
  16. इग्नू में भ्रष्टाचार, मीडियाः चुप्पी की कीमत
  17. सूचना के अधिकार कानून में कटौती
  18. प्रदूषण: धुंध में दिल्ली
  19. ‘नेट’ के जाल में सर्जनशीलता
  20. संपादकीय : दो मौतों की एक कहानी
  21. कॉरपोरेट शिक्षक सम्मान के निहितार्थ
  22. पत्र : उम्मीद से ज्यादा बचकानापन

November 2012

  1. घटनाक्रम
  2. सिटिजन जैन और भारतीय मीडिया के अनाचार की कहानी
  3. पुस्तक : मुश्किलों की चाहत से भरा कस्बा
  4. दिल्ली मेल : साहित्य, सत्ता और भ्रष्टाचार
  5. नोबेल पुरस्कार : खामोशी के निहितार्थ
  6. एक दबा हुआ आर्तनाद
  7. रिपोर्ताज : तीन गांवों की कहानी
  8. टूटे बिखरे ग़ज़ा में ज़िंदगी के धक्केः यात्रा वृतांत
  9. सामान्य गुजरात बनाम मोदी का गुजरात
  10. उच्च शिक्षा : भ्रष्टाचार की सहभागिता
  11. उत्तराखंड : बर्बादी की ऊर्जा परियोजनाऐं
  12. विशेष : श्रद्धांजलि : युग का इतिहासकार
  13. मलाकंड से जिंद तक
  14. हरियाणा : दलित उत्पीड़न का जातीय समीकरण
  15. मंच : पुलिस राज का विरोध करें
  16. मलाला की डायरी
  17. समाचार-संदर्भ : क़ाजमी को क्यों पकड़ा गया?
  18. लोकतंत्र की ढाल, पूंजीवाद का साम्राज्य
  19. संपादकीय : परिवारवाद पर चोट

October 2012

  1. कविता : व्यवस्था विरोधी और लोकतांत्रिक स्वर
  2. कितना बचा है वह शब्द?
  3. काव्य नाटक : ब्लैकहोल खलनायक है संपूर्ण सृष्टि का
  4. नायपाल की दृष्टि में भारत
  5. जिंदगी के रंग
  6. जानी-पहचानी स्थितियां
  7. सामाजिक और राजनीतिक चेतना की कहानियां
  8. मंटो कुछ अनछुए पहलू
  9. सीमित दायरे में स्त्री-प्रश्न
  10. कायांतरण बनाम आत्मांतरण
  11. कविता का जनपक्षधर चेहरा
  12. सुरहरे दिनों के सपने
  13. कथा साहित्य : अपनी जमीन का अंधेरा और रोशनी का आसमान
  14. संस्मरण : ऊंचाई की सीमा
  15. संस्मरण : खाकसारों को बड़ी तकलीफ होती है
  16. यात्रा : यायावरों के साथ
  17. समाज-व्यवस्था :वर्ण व्यवस्था का पायदान
  18. समाज विज्ञान : जनसंख्या समस्या का स्त्री पाठ
  19. पाकिस्तान : असुरक्षा से अनिश्चितता तक
  20. पश्चिम एशिया : यथास्थितिवाद के खिलाफ जन आक्रोश और नई चुनौतियां
  21. आखिर आपकी पॉलिटिक्स क्या है?
  22. घटनाक्रम–अक्टूबर 2012
  23. पत्र : अधिरचना सत्तासीन राजनीति से अनुकूलित होगी ही
  24. मीडिया : कोयले की दलाली से कोयले के व्यापार तक
  25. दिल्ली मेल : लेखन और सत्ता की असहिष्णुताः संदर्भ तस्लीमा नसरीन
  26. साक्षात्कार : ‘ मेरे लिए कला का सचेत-सृजन कला नहीं है ’
  27. विशालतम लोकतंत्र का संकीर्णतम इतिहास
  28. विचार : लूट-तंत्र में बदलता लोकतंत्र
  29. पाठयक्रम का व्यापार
  30. पुलिस की नजर में अल्पसंख्यक का मतलब
  31. साक्षात्कार : अचानक आनेवाली बाढ़ें मानव निर्मित अपदायें हैं
  32. प्राकृति आपदाएं : क्या हम अब भी कुछ सीखेंगे?
  33. संपादकीय : सांप्रदायिकता का अप्रत्यक्ष निवेश

September 2012

  1. घटनाक्रम– सितंबर 2012
  2. दिल्ली मेल : राजेंद्र यादव, गोपीचंद नारंग,अकादमी और भिड़ंत
  3. निधन : ए.के. हंगल
  4. फिल्म : अरब-एशिया का सिनेमा
  5. लूट-शोषण के खिलाफ बोलोगे तो मारे जाओगे
  6. दवा परिक्षण : निशाने पर छोटे शहर
  7. ओलंपिक : खेल और समाज का रिश्ता
  8. मेडिकल हब में डॉक्टरों का अकाल
  9. अण्णा और रामदेव का आंदोलन राजनीतिक शून्य की देन
  10. हिग्स-बोसॉन फील्ड अर्थात विज्ञान के भगवान की खोज
  11. सोनी सोढी की प्रताड़ना
  12. विरोध का नया हथियार कार्टून
  13. महादेवी सृजन पीठ : एक साहित्यिक संस्था की हत्या की कहानी
  14. पत्रकारिता का नीतिशास्त्र
  15. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनः कुछ तथ्य कुछ सवाल
  16. सोशल मीडिया पर लगाम
  17. संपादकीय : प्रशासन को अंग्रेजी क्यों चाहिए?
  18. अस्मिता आंदोलनों के द्वंद्व

August 2012

  1. घटनाक्रम : अगस्त 2012
  2. निधन : मृणाल गोरे
  3. किताब के बहाने: अमेरिका में सराबोर भारत
  4. पाठ्यक्रम और छात्रों के बीच
  5. ईरान पश्चिमी जगत और तेल की राजनीति
  6. मीडिया का भगवान
  7. खाप पंचायतों की राजनीति- भेड़ की खाल में
  8. काव्य का स्वार्थ विज्ञान, पतन का प्रमाण
  9. मंच : मंटो के व्यक्तित्व को समझना होगा
  10. ‘यह जमीं है तुम्हारी, यह जमीं है हमारी’
  11. अनियोजित नहीं है आग्रह पूर्वाग्रह
  12. सार्वजनिक साहित्यिक संस्थाओं का राजनैतिक रूपांतरण
  13. तेरे मरने के बाद ख्याल आया
  14. ब्रेविक हारा, आवाम जीती
  15. किसके लिए ओलंपिक
  16. दिल्ली मेल : नौ सौ चूहे खाके……..
  17. बांध : विकास नहीं विनाश का पर्याय
  18. ब्रह्मांड की रचना और हिग्स बोसॉन यानी कण-कण में विज्ञान
  19. बहुगुणा की जीत या नैतिकता की हार
  20. संपादकीय : शौचालय बनाम हथियार

July 2012

  1. घटनाक्रम
  2. निधन
  3. पत्र : इस आक्रमण की निंदा करें
  4. मानवता का प्रतीकः प्रेमचंद
  5. भारत में सिनेमा के सौ साल – 2
  6. भारत में सिनेमा के सौ साल – 1
  7. कार्टून विवाद :तर्कशील दलित नेतृत्व के अभाव का सवाल
  8. बिहार : तीन मुखियाओं की कहानी और 2014 का चुनाव अभियान
  9. अमेरिका की सफाया सूची
  10. मीडिया शिक्षण का व्यापार
  11. दिल्ली मेल : भ्रष्टाचार का महाचक्र
  12. अलंगः दस साल पहले से
  13. टिहरी बांध : बांध में डूबी जिंदगियां
  14. दृष्टिकोण : विवाद की शब्दावली
  15. ‘जी हां, मैं मुकदमेबाज हूं …’
  16. समाचार-संदर्भ : हिमालयः बसेगा तो बचेगा
  17. मंच : सीमा आजाद के नाम पत्र
  18. संपादकीय : क्या इंटरनेट एक लोकतांत्रिक माध्यम के रूप में बच पाएगा?

June 2012

  1. समाज विज्ञान : हिंदुत्व की स्त्रीवादी चीरफाड़
  2. शब्द कोश : डिजिटल विभाजन के खिलाफ
  3. उस दुनिया का दूसरा सच
  4. कहानी : तमाशा
  5. संस्मरण : करुणा उपजाती अज्ञेयता
  6. मंटो-शताब्दी: …बड़ा अफसाना निगार
  7. कथा साहित्य: इस्लाम और औरत
  8. उपन्यास में शोध
  9. आलोचना : उपन्यास यथार्थ और अस्मिता
  10. हिंदी उपन्यास में देह व्यापारः स्त्री की नजर से
  11. व्याख्यान : पितृसत्ता और वेश्यावृत्ति का रिश्ता
  12. संस्कृति : भारतीय साहित्य और मुसलमान
  13. सांप्रदायिकता/अंग्रेजी : फासीवाद के प्रेत
  14. विज्ञान : वैज्ञानिक चेतना की जरूरत
  15. दलित विमर्श : गंदगी की जातिगत व्यवस्था
  16. पश्चिम एशिया : फिलिस्तीन के यहूदीकरण की दास्तान
  17. राजनीति/अंग्रेजी : परिवर्तन की पटकथा
  18. अर्थजगत : नव उदारवाद और विकास के अंतर्विरोध
  19. अर्थ के अनर्थ की तहकीकात
  20. पत्र : अंग्रेजी का कमाल
  21. घटनाक्रम : जून 2012
  22. एड्रिएन रिच की कविताएं
  23. नैट पर समयांतर : www.samayantar.com
  24. भारत-पाक संबंध : बर्फीले संबंध और ग्लेशियर की दरारें
  25. बांधों की ये हवस
  26. लेखकों के लिए सबक
  27. दिल्ली मेल : पर उपदेश कुशल बहुतेरे
  28. दिल्ली मेल : शीतयुद्ध के पुराने हथियार, नये प्रहार
  29. फिल्मों का पदातिक
  30. लोकतंत्र में समाचार की कीमत
  31. काली करतूतें सफेद झूठ
  32. प्राकृतिक संसाधनों की लूट की परियोजनाएं–2
  33. प्राकृतिक संसाधनों की लूट की परियोजनाएं–1
  34. कार्टून विवाद : शिक्षा की राजनीति के खिलाफ
  35. संपादकीय : श्रद्धा और सांप्रदायिकता के बीच की तीर्थयात्रा

May 2012

  1. श्रद्धांजलि : मस्तराम कपूर
  2. समीक्षा : अमेरिका रूपम्
  3. अर्थव्यवस्था : सिर्फ जरूरी सामानों की कीमतें क्यों बढ़ती हैं?
  4. मराठवाड़ा : सत्ता और सूखे के बीच लहलहाता गन्ना
  5. अब डिमांड पर दंगे?
  6. वे अदालतों के पार हैं
  7. व्यवसायिकता और सरकारी तंत्र के बीच
  8. ‘जो कहा जाना चाहिए’ सो कहा जाना चाहिए
  9. घटनाक्रम–मई 2012
  10. हाशिये पर खुश वामदल
  11. मीडिया और मोदी
  12. दिल्ली मेल : प्रलेस में बदलाव
  13. खेल का राजनीतिक खेल
  14. ममता की क्षमता
  15. मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार – 2
  16. मजदूर वर्ग और साम्राज्यवादी युद्धों पर कुछ विचार – 1
  17. पूंजीवाद एक प्रेत कथा-भाग तीन
  18. पूंजीवाद एक प्रेत कथा-भाग दो
  19. पूंजीवाद एक प्रेत कथा-भाग एक
  20. नई दुनिया: एक परंपरा का अंत
  21. बथानी टोला जनसंहारः न्याय का पाखंड
  22. संपादकीय : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम पैसा कमाने की स्वतंत्रता