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समाज के आइने में खुद को निहारता मन

July 7th, 2010

चन्द्रकला
लगता नहीं है दिल मेरा व और… और… औरत: कृष्णा अग्निहोत्री; सामयिक प्रकाशन;
पृ.ः 352 व 160; मूल्यः 495 व 250
ISBN : 978.93.80458.01.4, 978.93.80458.02.1
मनुष्य की यह आदिम प्रवृत्ति है कि छिपे हुए को अनावृत करने, दबे हुए को कुरेदने और अमूर्त अज्ञात रहस्य को मूर्त ज्ञात कर सामने लाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहता है। उसकी [...]