‘विशेष लेख’ वर्ग के अंतर्गत सभी प्रविष्टियाँ

भारत के बारे में मार्क्स: एक संशोधनवादी एजेंडा

August 15th, 2010

विशेष लेख
मार्क्स ने अरब, तुर्क, तरतार, मुगलों आदि द्वारा भारत की फतह के लिए खुद भारत पर ही दोष मढ़ है। उनकी इस दलील को ऐसे भी पढ़ा जा सकता हैः यदि बर्बर सभ्यताएं दूसरे देशों पर फतह कर सकती हैं, तो उच्चतर सभ्यताओं के पास ऐसी बर्बर कार्रवाइयां करने का स्वाभाविक अधिकार निर्विवाद रूप [...]

कौशांबी का कुफ्र

August 15th, 2010

विशेष लेख
देश के स्वाधीनता संग्राम के निर्णायक काल बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में ज्ञान-विज्ञान और मानव के प्रयासों का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं था जिसमें विलक्षण विभूतियों का आविर्भाव न हुआ हो। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डी.डी. कौशांबी को आज उन्हीं यशस्वी लोगों में गिना जाता है। महाराष्ट्र के ही एक और महारथी बी.आर. अम्बेडकर [...]

प्रतिनिधित्व की समस्या और महिला आरक्षण विधेयक

July 7th, 2010

इन्द्रजीत कुमार झा
ऐतिहासिक रूप से देखें तो, महिलाओं के प्रतिनिधित्व एवं नागरिकता संबंधी अवधारणाएं ऐसे विमर्शों एवं प्रशासनिक व्यवहारों से घिरी हुई हैं, जो महिलाओं को अयोग्यता को प्रदर्शित करने वाली श्रेणी के रूप में प्रस्तुत करती हैं। यह भी एक विडंबनापूर्ण तथ्य है कि उसकी विशिष्ट जैविक-वैज्ञानिक संरचना और इस संरचना से जुड़ी सामाजिक [...]