समानांतर मत : क्या भाजपा का पैसा कांग्रेस के पैसे को पीट देगा?

इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली का 28 सितंबर, 13 का संपादकीय भारत की संविधान सभा ने जब राष्ट्रपति पद्धति वाली कार्यपालिका का विकल्प नामंजूर किया था, तब यह बात स्मृति...

धार्मिक पर्यटन राजनीति और अन्‍य सवाल

आखिर पर्यटन में इतनी बढ़ोतरी के कारण क्या हो सकते हैं? निश्चय ही इस बीच लोगों की आय में वृद्धि हुई है और आवागमन के साधनों का विकास भी,...

सांप्रदायिकता :मल्लेश्वरम या हुबली : कर्नाटक में हिंदुत्व आतंक

सांप्रदायिकता विरोधी संघर्ष को नई धार देने में जुटे "कर्नाटक कौमू सौहार्दु वैदिके’ - जो लगभग 200 संगठनों का साझा मंच है - के बैनर तले मंगलौर में रविवार...

मराठवाड़ा : सत्ता और सूखे के बीच लहलहाता गन्ना

अभिषेक श्रीवास्तव महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सरकार ने आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा भले मार्च में की, लेकिन भूलना नहीं चाहिए कि पिछले साल अगस्त में ही 400 गांवों...

सांप्रदायिकता-दो : जहर उगलो, महासचिव बनो!

इति श्री वरुण गांधी गाथा: ""अपने जाओ, अपने गांव जाओ और हल्ला करो कि सारा हिंदू एक तरफ हो जाओ। क्षेत्र को पाकिस्तान होने से बचाओ, और सारा हिंदू...

साहित्य अकादेमी : हिंदी का गौरव काल ?

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के अध्यक्ष बनने से हिंदी जगत इस बात को लेकर मस्त है कि केंद्रीय साहित्य अकादेमी के इतिहास में पहली बार एक हिंदी लेखक सर्वोच्च पद...

पूंजीवाद का संकट और मार्क्‍सवाद की चुनौतियां

मार्क्‍सवाद का औचित्य लाल्टू बाईस साल पहले जब बर्लिन की दीवार गिरी और सोवियत संघ के प्रभाव क्षेत्र में विघटन की प्रक्रिया की शुरुआत हुई तो पूंजीवाद के पक्षधरों...

अस्मिता की लड़ाई और वाम

मौजूदा दौर में पहचान की राजनीति के अधिक सादृश्यता हासिल करने का मतलब क्या यह कहना मुनासिब होगा कि यह मसला अपने आप में अनोखा है, जिसका कोई इतिहास...

क्या विकास पूरा हो चुका है?

लूई प्रोयेक्ट पूंजीवाद के संकट का सवाल विश्व के प्रमुख औद्योगिक राष्ट्रों के सम्मुख जिस तरह खड़ा है वैसा 1930 के दशक के बाद कभी नहीं हुआ था। जहां एक...