विविध

विविध : कुछ बांकी संदर्भ

शिक्षा व सामाजिक व्यवस्था के प्रति गलत समझ का नमूना

मंच शिक्षा आठवीं कक्षा तक नो-डिटेंशन नीति को हटाने का निर्णय लेकर दिल्ली सरकार ने अधिगम (सीखने), शिक्षा, स्कूल व सामाजिक व्यवस्था के प्रति अपनी गलत समझ का सबूत दिया है। बच्चों में सीखने के स्तर को सुधारने हेतु ‘फेल होने का डरÓ न तो वास्तव में एक कारगर उपाय है और न ही इस [Read the Rest…]

अध्यक्ष का वक्तव्य

इलाहाबाद विवि का छात्रसंघ ऋचा सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में छात्रसंघ के अध्यक्ष का चुनाव जीत कर नया इतिहास रचा है। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 128 साला इतिहास में पहली महिला अध्यक्ष हैं। मेरे मित्रो, आप 20 नवम्बर को दिन में हुए घटनाक्रम से वाकिफ हैं। आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के पद [Read the Rest…]

वर्तमान को अतीत की जरूरत

साक्षात्कार प्रसिद्ध इतिहासकार और चिंतक रोमिला थापर से रणबीर चक्रवर्ती की इतिहास, समाज और संस्कृति पर बातचीत की समापन्न किस्त। अंग्रेजी पाक्षिक  ‘फ्रंलाइनÓ से साभार प्रस्तुत यह साक्षात्कार का थोड़ा संपादित रूप है।  प्रश्र: निर्देशात्मक (नोर्मेटिव) पाठ से जुड़े सवाल पर आपका मत। उत्तर: आज इतिहासकार निर्देशात्मक ग्रंथों (टेक्स्ट या पाठ) पर सवाल उठा रहे [Read the Rest…]

गहराता समाजिक राजनीतिक संकट

नेपाल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से लगा है नेपाल का बैतड़ी जिला। बैतड़ी जिले की त्रिपुरा सुंदरी में कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बड़ा मेला लगता है, जिसमें भाग लेने के लिए पश्चिमी नेपाल के विभिन्न जिलों के लोगों के साथ ही भारत के सीमावर्ती क्षेत्र से भी जाते हैं। इस मेले [Read the Rest…]

बस्तर में वकीलों, पत्रकारों पर हमले

बस्तर बार एसोसिएशन द्वारा पुलिस के साथ सांठगांठ से जिस तरीके से जगदलपुर लीगल ऐड ग्रुप (जगलग) को स्थानीय आदिवासियों की कानूनी मदद करने से रोका जा रहा है, उस पर पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स गहरी चिंता व्यक्त करता है। तकनीकी अड़चन को आधार बनाकर 3 अक्टूबर को बार एसोसिएशन ने जगलग के खिलाफ [Read the Rest…]

वैज्ञानिक भार्गव और संघी तर्क

वैज्ञानिक पुष्पमित्र भार्गव ने पदम भूषण सम्मान वापस किया तो बीजेपी ने वक्तव्य दिया वे हेट मोदी ब्रिगेड के सदस्य हैं। सोनिया गांधी के चाटुकार हैं। उन्हें कांग्रेस ने सम्मानित किया था। फासीवाद, संघ और बीजेपी की विचारधारा का आधार है। आज वेंकटरमण जिंदा होते और वे फासीवाद के विरद्ध बोलते तो बीजेपी की भाषा [Read the Rest…]

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