भारत के कॉरपोरेट संपादक और ब्रिटेन की लेवसन रिपोर्ट
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) ने पिछले दिनों दक्षिण दिल्ली के अपने शानदार ऑफिस में पत्रकारिता की वर्तमान हालत पर एक बातचीत का आयोजन किया। इसमें ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) के प्रतिनिधियों के अलावा न जाने किस गलती से मुझ जैसे कुछ एक्टिविस्ट और पत्रकारों को भी बुला लिया गया। बहस में बीईए के महासचिव [Read the Rest...]
सिटिजन जैन और भारतीय मीडिया के अनाचार की कहानी
”तुमसे मुझे सहानुभूति है। तुम समझते हो कि मैं एक बदमाश हूं, मेरे अखबार को तुरंत बंद कर दिया जाना चाहिए, मेरी जांच के लिए कमेटी गठित की जानी चाहिए। तुम चाहो तो ऐसी कमेटी गठित कर सकते हो। लेकिन मुझसे कमेटी के लिए चंदा लेना मत भूलना।” -चाल्र्स फॉस्टर केन, सिटीजन केन का नायक [Read the Rest...]
मीडिया : कोयले की दलाली से कोयले के व्यापार तक
भारत में कोयला घोटाले ने एक बार फिर तथाकथित लोकतांत्रिक संस्थाओं के चेहरे से नकाब हटाने के काम किया है। एक लाख छियासी हजार करोड़ की कोयले की दलाली में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ पक्ष-विपक्ष के कई नेता तो कटघरे में हैं ही, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दम भरने वाला समाचार मीडिया [Read the Rest...]
पत्रकारिता का नीतिशास्त्र
गुवाहाटी में एक लड़की को सरेआम अपमानित किया जाता है। उसके कपड़े फाड़े जाते हैं और उस पर अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं। पास खड़ी भीड़ तमाशा देखती रहती है। मीडिया में कवरेज मिलने के बाद यह घटना राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनती है। लड़की को अपमानित करने वाले हैवानों की आलोचना होने लगी। टीवी [Read the Rest...]
अनियोजित नहीं है आग्रह पूर्वाग्रह
मीडिया के समाजशास्त्र और राजनीति पर जब बात होती है तो विश्लेषण का नजरिया तीन स्पष्ट भागों में बंट जाता है। पहला नजरिया मीडिया के काम-काज के मौजूदा तरीके को बेहतरीन करार देता है। तर्क देने वालों का मानना होता है कि मीडिया पर आग्रह-पूर्वाग्रह के जो आरोप लगाए जाते हैं वे लगभग आधारहीन हैं। [Read the Rest...]

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