चरित्र हनन का पांडित्व
August 16th, 2010मंच
दूधनाथ सिंह की किताब पर हरिमोहन शर्मा की समीक्षा (जून अंक ) पढ़ी। किताब की तारीफ में समीक्षक ने जो कसीदे गढ़े हैं, उसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है, मगर मुझे उनके इस उपसंहारात्मक वाक्य पर आपत्ति है,: ‘‘यदि इस पुस्तक में चित्रित महादेवी के ‘उन्मत्त प्रेम प्रसंग’, नरसिंहगढ़ निवास तथा उनके जन्मतिथि-संबंधी [...]