‘मंच’ वर्ग के अंतर्गत सभी प्रविष्टियाँ

चरित्र हनन का पांडित्व

August 16th, 2010

मंच
दूधनाथ सिंह की किताब पर हरिमोहन शर्मा की समीक्षा (जून अंक ) पढ़ी। किताब की तारीफ में समीक्षक ने जो कसीदे गढ़े हैं, उसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है, मगर मुझे उनके इस उपसंहारात्मक वाक्य पर आपत्ति है,: ‘‘यदि इस पुस्तक में चित्रित महादेवी के ‘उन्मत्त प्रेम प्रसंग’, नरसिंहगढ़ निवास तथा उनके जन्मतिथि-संबंधी [...]

धर्म के दायरे में नारी मुक्ति का सवाल

July 7th, 2010

तैयब हुसैन
जुलैखा जबीं का लेख (समयांतर, अपै्रल 2010 अंक) ‘महिला आरक्षण और पुरुष सत्ता’ के पूर्वार्द्ध से तो मैं सहमत हूं किंतु उत्तरार्द्ध में कई बातें आधी-अधूरी, विवादास्पद और विरोधाभासी हैं। मजहब (धर्म) चाहे कोई भी हो, वह मर्दों की देन है और हंसिया जब भी खींचेगा, अपनी ओर ही खींचेगा। (‘मर्दों ने बनाई जो [...]