संपादकीय : भाषा और राजनीति

पिछले दो महीनों में कुछ ऐसी घटनाएं घटीं, जिन्होंने औपनिवेशिक बनाम भारतीय भाषाओं के संघर्ष और द्वंद्व को एक बार फिर सामने ला दिया। यह बात और है कि...

संपादकीय : ‘दैवीय आपदा’ का दानवीय सच

उत्तराखंड की त्रासदी जिस हद तक मानव निर्मित है वह स्तब्धकारी है। आपदा होने से कहीं ज्यादा यह दुर्घटना है जिसे निश्चय ही रोका जा सकता था। इसे दैवीय...

संपादकीय : भाषा और वर्चस्व

हिंदी: कान से ढाका तक इस महीने एक छोटी पर महत्त्वपूर्ण घटना घटी। वह थी दुनिया के अत्यंत प्रतिष्ठित फिल्म समारोह कान, फ्रांस के उद्घाटन समारोह में हिंदी में प्रयोग।...

संपादकीय : बलात्कार , मजदूर और चिट-फंड

बलात्कार को लेकर पिछले चार महीनों से जो उथल-पुथल हमारे समाज में देखने को मिल रही है वह हमारे समाज में हो रहे गंभीर सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बदलावों...

संपादकीय

हथियार और राजनीति का संबंध यह देखना कम निराशाजनक नहीं है कि अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद के मसले को लगभग सारा मीडिया पूरे संदर्भ से काट कर देख रहा है।...

संपादकीय : महत्वपूर्ण सिफारिशें

गोकि यह उम्मीद करना ज्यादती होगी कि न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की तीन सदस्यीय समिति की महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर दी गई रिपोर्ट से आमूल बदलाव हो...

संपादकीय : दिल्ली दूरस्त

गुजरात के चुनावों से एक बात समझ में आने लगी है कि हिंदूवादी ब्रिगेड और उसके बैंड बाजे में शामिल मुख्यधारा का मीडिया नरेंद्र मोदी को लेकर बड़े पैमाने...

संपादकीय : दो मौतों की एक कहानी

इसे महज इत्तफाक ही कहा जाएगा कि उन दो लोगों से, जिनकी मृत्यु एक ही दिन हुई, मीडिया एक पखवाड़े बाद भी मुक्त नहीं हो पा रहा है। पर...

संपादकीय : परिवारवाद पर चोट

और जो भी हो इंडिया अगेंस्ट करप्शन और इसके नेता अरविंद केजरीवाल का हमें आभारी होना होगा कि उन्होंने भारतीय राजनीति में फैले व्यापक भ्रष्टाचार को एक बार फिर...

संपादकीय : सांप्रदायिकता का अप्रत्यक्ष निवेश

खुदरा बहु ब्रांड के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर भारतीय राजनीति में जो घटाटोप चल रहा है और उसके कारण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए -दो)के भविष्य...