संपादकीय : तीसरी दुनिया के लिए चावेज का अर्थ
पिछले छह दशकों में ऊगो चावेज तीसरी दुनिया के अकेले ऐसे नए नेता हैं, जिन्होंने अपने समाज और तीसरी दुनिया के पिछड़े व अविकसित देशों को नई राह दिखाने और उन्हें नेतृत्व देने में, महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका उदय ऐसे समय में हुआ था जब नवसाम्राज्यवादी ताकतों ने दुनिया पर अपनी पकड़ नए सिरे से [Read the Rest...]
संपादकीय
हथियार और राजनीति का संबंध यह देखना कम निराशाजनक नहीं है कि अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद के मसले को लगभग सारा मीडिया पूरे संदर्भ से काट कर देख रहा है। ऐसा लगता है जैसे इन हेलीकॉप्टरों की खरीद अगर नियम से हुई होती तो पवित्र होती। भारत दुनिया के हथियारों के सबसे बड़े खरीदारों में [Read the Rest...]
अतिथि संपादकीय : पूंजीवाद के बरक्स समाजवाद का सपना
तरक्की के तमाम दावों के आइने में जब हम आसपास देखते हैं तो असमानता, शोषण, दमन, गरीबी, बेरोजगारी और विकास के नाम पर की जा रही लूट-खसोट का एक अंतहीन सिलसिला नजर आता है। यह सब उस पूंजीवादी व्यवस्था में हो रहा है जो कहती है कि उसका कोई विकल्प नहीं और वही मनुष्य के [Read the Rest...]
संपादकीय : महत्वपूर्ण सिफारिशें
गोकि यह उम्मीद करना ज्यादती होगी कि न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की तीन सदस्यीय समिति की महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर दी गई रिपोर्ट से आमूल बदलाव हो जाएगा, पर यह निश्चित है कि इस रिपोर्ट से जिसमें कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं, फौजदारी कानून में तो बदलाव होगा ही, इससे महिलाओं में [Read the Rest...]
संपादकीय : दिल्ली दूरस्त
गुजरात के चुनावों से एक बात समझ में आने लगी है कि हिंदूवादी ब्रिगेड और उसके बैंड बाजे में शामिल मुख्यधारा का मीडिया नरेंद्र मोदी को लेकर बड़े पैमाने पर मिथक को गढऩे में लगा है। प्रचार-प्रोपेगेंडा में माहिर यह ब्रिगेड शासक वर्ग के भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता से बदहाल, राजनीतिक विकल्पहीनता के मारे, पर सबसे [Read the Rest...]
संपादकीय : दो मौतों की एक कहानी
इसे महज इत्तफाक ही कहा जाएगा कि उन दो लोगों से, जिनकी मृत्यु एक ही दिन हुई, मीडिया एक पखवाड़े बाद भी मुक्त नहीं हो पा रहा है। पर क्या इसे भी इत्तफाक कहा जा सकता है कि दोनों में जो अजीब-सी समानता नजर आती है। उसका रंग-रूप चाहे वह जितना भी अप्रत्यक्ष हो, बहुत [Read the Rest...]
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