‘पुस्तक-समीक्षा’ वर्ग के अंतर्गत सभी प्रविष्टियाँ

भगवान के फैलते बाजार में चंद सवाल

July 7th, 2010

अभिषेक श्रीवास्तव
द गॉड मार्केट – हाउ ग्लोबलाइजेशन इज मेकिंग इंडिया मोर हिंदू: (अंग्रेजी) मीरा नंदा; रैंडम हाउस; मूल्यः रु. 395.00; पृ.: 240
ISBN 97881.84000.955
अगर समकालीन भारत में सांप्रदायिकता का इतिहास लिखा जाए, तो किन वर्षों को महत्वपूर्ण माना जाएगा? जाहिर तौर पर पहला जवाब 1992 ही होगा, जब दक्षिणपंथी ताकतों ने अयोध्या की बाबरी [...]

हिंदी आलोचना का प्रथम पुरुष

July 7th, 2010

रामाज्ञा शशिधर
बालकृष्ण भट्ट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ: अभिषेक रोशन; पृ.सं.ः 216;
मूल्यः रु. 390; अंतिका प्रकाशन
ISBN 978.93.80044.10.1
यह हिंदी आलोचना का हड़ताल युग है। लगता है कि आलोचना का पड़ताल युग खत्म हो चुका है। पड़ताल युुुग की आलोचना रचना के समय और समाज से संवाद बनाती थी, रचना की कलात्मकता की शिनाख्त करती थी, [...]

महादेवीः एक नई छवि

July 7th, 2010

हरिमोहन शर्मा
महादेवी: दूधनाथ सिंह; राजकमल प्रकाशन, पृ.ः 435, मूल्यः रु. 600 रू
ISBN: 878.81.267.1753.8
दूधनाथ सिंह की नई पुस्तक छायावाद की प्रतिष्ठित कवयित्री और अप्रतिम गद्यकार महादेवी वर्मा को समग्रता में समझने का एक नूतन प्रयास है। विशेषता यह है कि यह पुस्तक अधिकांशतः पठनीय गद्य में लिखी गई है। इस पुस्तक से महादेवी वर्मा की पीड़ावादी, [...]

जासूसी अदब की सकारात्मकता

July 7th, 2010

अनवार रिज़वी
1. दिलेर मुजरिम, 2. जंगल में लाश, 3. औरत फरोश का हत्यारा 4. तिजोरी का रहस्य, 5. फरीदी और लियोनार्ड, 6. कुएं का राज, 7. चालबाज बूढ़ा, 8. नकली नाकः इब्ने सफी; अनु.ः चैधरी ज़िया इमाम; संपादकः नीलाफ; हार्परकॉलिंस; पृ. 125 से 140 तक; प्रत्येक का मूल्यः रु. 60; पेपर बैक शृंखला
अपने जमाने के [...]

स्त्री आंदोलन के सवाल

July 7th, 2010

शिवानी चोपड़ा
भारत में स्त्री अध्ययन का क्षेत्र 1970 के दशक से लगातार व्यापक और विस्तृत होता गया है। विभिन्न समयों में स्त्रियों के सवाल को कैसे उठाया गया, इसकी साहित्य और इतिहास में जांच-पड़ताल की गई। जिन सामाजिक-आर्थिक शक्तियों, व्यवस्था की संरचनाओं ने इतिहास को गढ़ा व रचा, और संस्कृति व परंपरा के जिस [...]

स्त्री जीवन की रचनात्मक अभिव्यक्ति

July 7th, 2010

रेखा एस. यादव
मिलजुल मनः मृदुला गर्ग; सामायिक प्रकाशन; पृ.सं.ः 319; मूल्य-495. ISBN : 978.81.7138.201.9
यह सुखद है कि हाल के वर्षों में स्त्री लेखिकाओं ने अधिक सामथ्र्य के साथ अपने लेखन की चैहद्दियों का विस्तार किया है। अब उनके लेखन में ऐसे मुद्दे केंद्र्रीयता प्राप्त कर रहे हैं, जिन पर अब तक बात न करके उनकी [...]

उपन्यासों के बहाने कानून और न्याय व्यवस्था

July 7th, 2010

रामशरण जोशी
राम राज्यः मित्रसेन मीत; अनु: अर्जुन शर्मा; हरियाणा पुलिस अकादमी; मूल्य: रु. 195 (पेपर बैक) , पृष्ठ: 934
ISBN : 81.8235.081.6
‘‘पुलिस न केवल जुर्मों को बंद करने, अपराधियों को गिरफ्तार करने और जान-माल की रक्षा करने में ही असफल रही है, बल्कि हमारी पुलिस स्वयं अत्याचार का एक साधन है और लोगों के नैतिक [...]

पारिवारिक अंतर्द्वंदों का आईना घर

July 7th, 2010

पंकज चैधरी
बंधनः पंकज चैधरी; राजकमल प्रकाशन; मूल्य: रु. 350 , पृष्ठ: 1000
आधुनिक जीवन की त्रासदी को सबसे ज्यादा उपन्यासों में उठाया गया है। यह त्रासदी एक ओर जहां शोषकों और शोषितों के संबंधों पर आधारित रही है, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर बड़े शहरों या महानगरों के पारिवारिक विघटनों पर भी आधारित रही [...]

फिल्मी दुनिया की एक अमर प्रेम कथा

July 7th, 2010

दीवान सिंह बजेली
डार्लिंग जीः किश्वर देसाई; अनु. सोनल मित्रा; हार्पर कोलिंस; पृ.ः 442; मूल्यः 299
ISBN : 978.81.7223.871.1
महबूब द्वारा निर्मित निर्देशित फिल्म मदर इंडिया का प्रथम प्रदर्शन बंबई के लिबर्टी थियेटर में 25 अक्तूबर, 1957 को हुआ। यह फिल्म भारतीय फिल्म इतिहास में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखती है। संभवतः यह प्रथम भारतीय फिल्म है जिसने विश्व सिनेमा [...]

कहना जरूरी और गैरजरूरी

July 7th, 2010

हरीश तिवारी
…कहना जरूरी थाः कन्हैयालाल नंदनः सामयिक प्रकाशन; मूल्य: रु. 250 (पेपर बैक) , पृष्ठ:176
ISBN : 978.81.7138.190.6
मेरे सामने कन्हैयालाल नंदन की यह संस्मरणात्मक पुस्तक है, जिसके मुखपृष्ठ पर उनकी रंगीन तस्वीर है। चश्मे के भीतर से झांकती आंखें, जिनमें ‘गोल दागने’ वाले खिलाड़ी जैसी चमक है। हाथ पीठ पर होंगे, इसलिए नहीं दिखाई देते, पर [...]

तथ्यों और तारीखों के बोझ से मुक्त एक जीवनी

July 7th, 2010

सुल्तान त्यागी
मक़बूल: अखिलेश; राजकमल प्रकाशन;
पृ: 95; मूल्यः 300
ISBN : 978.81.267.1863.4
अखिलेश द्वारा लिखित ‘‘(मकबूल) मकबूल फिदा हुसैन की जीवनी’’ को लेखक ने दो भाग में बांटकर लिखा, पहला भाग जिसका शीर्षक ‘लो, वो दिखाई दिए हुसैन’ कृति का लगभग आधा भाग है बाकी आधे भाग को मां, दादा, चिमनी, नई मां, बड़ौदा की तालीम, कैमरा, मालवा, [...]

प्रश्नों के दायरे में स्त्री-विमर्श

July 7th, 2010

अजहर खान
तहखानों में बंद अक्स: चित्रा मुद्गल; कल्याणी शिक्षा परिषद्; पृ.ः 208; मूल्यः 300
ISBN : 978.81.88457.61.8
वरिष्ठ कथाकार चित्रा मुद्गल की किताब ‘तहखानों में बंद अक्स’ नारी अस्मिता से जुड़े कथात्मक लेखों का संग्रह है। इस किताब के ज्यादातर लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। अहम बात यह है कि ये लेख साक्षात्कार शैली [...]

सुबह का रंग भूरा

July 7th, 2010

फ्रांक पावलोफ
‘सुबह का रंग भूरा’ (माटिन ब्रुन) नाम की 12 पृष्ठों की दस्तावेज सरीखी कहानी के लेखक हैं फ्रांक पावलोफ। फ्रांसीसी लेखक पावलोफ पेशे से मनोविज्ञानी हैं और बाल अधिकारों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने सामुदायिक विकास और नशा विरोधी अभियानों के तहत अपना काफी वक्त अफ्रीकी और एशियाई देशों में बिताया है। पावलोफ ने वयस्कों [...]

समाज के आइने में खुद को निहारता मन

July 7th, 2010

चन्द्रकला
लगता नहीं है दिल मेरा व और… और… औरत: कृष्णा अग्निहोत्री; सामयिक प्रकाशन;
पृ.ः 352 व 160; मूल्यः 495 व 250
ISBN : 978.93.80458.01.4, 978.93.80458.02.1
मनुष्य की यह आदिम प्रवृत्ति है कि छिपे हुए को अनावृत करने, दबे हुए को कुरेदने और अमूर्त अज्ञात रहस्य को मूर्त ज्ञात कर सामने लाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहता है। उसकी [...]

स्मृतियों का आख्यान

July 7th, 2010

प्रेमपाल शर्मा
गांधी के देश में: सुधीर चन्द्र; राजकमल प्रकाशन; पृः 160; मूल्यः 200
जनसत्ता में प्रकाशित सुधीर चंद्र का स्तंभ ‘मगर फिर भी’ बहुपठित प्रिय स्तंभों में रहा है। उन्हीं दिनों उनके साथ लिखने वाले के. विक्रम सिंह, साजिद रसीद, कृष्ण कुमार, अलका सरावगी, नवीनतम तसलीमा नसरीन की याद भी पाठकों में देर तक बनी [...]

‘उत्तर-हिंदू’ भारत: कितना सच, कितनी कल्पना

July 7th, 2010

मीरा नंदा
पोस्ट हिंदू इंडियाः ए डिस्कोर्स इन दलित बहुजन, सोशियो-स्प्रिचुएल एंड साइंटिफिक रिवोल्यूशन: कांचा इलैया; सेज
भारत के बौद्धिक परिदृश्य पर कांचा इलैया का उभार 1996 में उनकी पुस्तक व्हाई आई एम नाॅट अ हिंदू से हुआ। इस पुस्तक में इलैया ने तकरीबन आत्मकथात्मक शैली में बताया था कि आखिर क्यों उनके और उनके साथी दलित-बहुजनों [...]

कश्मीर: अंतहीन यातना, अंतहीन लड़ाई

July 7th, 2010

अजय सिंह
कश्मीर: फ्रीडम थॉट्स, स्ट्रगल ऐंड टिरैनी (अंगे्रजी): रामरतन चटर्जी; रामरतन चटर्जी, कोलकाता; पृ.ः 524; मूल्यः 200
मार्च, 1990 में अंग्रेजी व हिन्दी में एक पुस्तिका आई थी, ‘इंडियाज कश्मीर वार’ (भारत की कश्मीर जंग)। कमेटी फाॅर इनीशिएटिव आॅन कश्मीर, दिल्ली से छपी इस पुस्तिका को, जो मुश्किल से पचास पेेज थी, गौतम नवलखा, दिनेश [...]

दलित और बाल्मीकि समाज का सच

July 7th, 2010

सुधांशु कुमार
दलितों के दलित (पे.बै.): हरकिशन संतोषी; सस्ता साहित्य मंडल; पृ: 339; मूल्यः 200
ISBN : 978.81.7309.341.8
भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था इसलिए की गई ताकि सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक रूप से हाशिए पर पड़े दलित एवं पिछड़े समुदाय के लोगों का विकास हो सके तथा हाशिए पर पड़े ये लोग समाज की मुख्यधारा का [...]

दुर्गम सीमांतों की जीवंत यात्राएं

July 7th, 2010

प्रदीप पंत
सीमांत डायरी: कश्मीर से कच्छ तकः मनोहर श्याम जोशी; वाणी प्रकाशन; पृ.ः 100; मूल्यः 200; ISBN : 978.81.81.43.845.4
एक अच्छे यात्रा संस्मरण की विशेषता यह होती है कि उसमें हम न केवल क्षेत्र-विशेष से रू-ब-रू होते हैं, वरन क्षेत्र विशेष, वहां के जरूरी गैरजरूरी स्थानों, लोगों आदि के प्रति लेखक के नजरिए [...]

रूस में कुछ दिन

July 7th, 2010

सुशील कुसुमाकर
पूश्किन के देस में: महेश दर्पण; कल्याणी शिक्षा परिषद्; पृः 224; मूल्यः 300
ISBN : 978.81.88457.60.1
कथाकार महेश दर्पण का यह संस्मरणात्मक यात्रा-वृत्तांत है। लेखक ने केवल रूस के प्राकृतिक सौंदर्य का चित्र ही नहीं खींचा, बल्कि वहां की सांस्कृतिक-सामाजिक एवं राजनैतिक स्थिति को भी सूक्ष्मता से देखा-परखा है।
उपर्युक्त यात्रा-संस्मरणों में सोवियत संघ के दौर [...]