सहजीवन और विच्छेद
July 7th, 2010प्रमीला के.पी
यौनिकता से मुक्ति का संकल्प सापेक्ष होता है। मगर यौनिक उच्छृंखलताओं से मुक्ति सामाजिक जीवन में अनुपेक्षणीय होती है। सभी समस्याओं को यौनिकता में चस्पाकर देखने की वृत्ति उत्तर आधुनिक संचारक्रांति का हिस्सा है। हर राजनैतिक व वैयक्तिक मुद्दे में एक या एकाधिक स्त्री को पात्र बनाने से कहानी खूब बिक जाएगी। कम से [...]