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आखिर हिंदी की उपयोगिता क्या है?

September 17, 2020 admin 0
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भाषा अपने बोलने वालों की बौद्धिक सक्रियता और गतिविधि का तो प्रमाण होती ही है, सत्ता से अपने जीवंत संवाद के सामथ्र्य की, और ज्ञान के संचयन की क्षमता के, अनुपातिक संबंध का भी मानदंड होती है। इसलिए उसके स्तर में समानता नहीं होती। दूसरे शब्दों में भाषा की शक्ति काफी हद तक उसके बोलने वालों की क्षमता पर निर्भर करती है। और यह क्षमता भाषा के स्वाभाविक गुणों से इतर कारणों से भी अर्जित की जाती है।

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लद्दाख में शुतुरमुर्ग

July 16, 2020 admin 0
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भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार की सीमाएं नेतृत्व की क्षमता के कारण धीरे-धीरे देश को गंभीर अनिश्चितता के दलदल की ओर धकेलती नजर आ रही हैं। पिछले तीन महीनों में कोरोना वायरस ने भारतीय जनजीवन और अर्थव्यवस्था को लगभग तहस नहस कर दिया है। भारत इस मायने में अपवाद नहीं है। लगभग पूरी दुनिया इसके चपेट में है पर जिस रूप में इसने भारतीय जीवन को प्रभावित किया है वैसा शायद ही किसी देश में हुआ हो।

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‘मत चूके चौहान’

June 8, 2020 admin 0
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मुजफ्फरपुर, बिहार से यह समाचार मुख्यधारा के मीडिया में दो दिन बाद 27 मई को पहुंच पाया था। घटना 25 मई अपरान्ह के बाद की है। अपने प्राइम टाइम बुलेटिन में एनडीटीवी ने एक क्लिपिंग दिखलाई जिसमें मुश्किल से दो साल का एक बच्चा प्लेटफार्म पर लेटी अपनी मां के ऊपर पड़ी चादर से खेल रहा है। बच्चा इस बात से अनभिज्ञ है कि मां नहीं रही है। वैसे भी इतने छोटे बच्चे से कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वह जाने कि मौत जिंदगी के कितने समानांतर चलती है? विशेष कर गरीबों के लिए।

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प्रकाशक जो मेरा लेखक था

May 5, 2020 admin 0
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मेरे लिए आश्चर्य था कि श्याम बिहारी राय (1934-10 मार्च 2020) ने हिंदी में पीएचडी की हुई थी और साहित्य की समझ में वह किसी से उन्नीस नहीं थे फिर भी उन्हें शैक्षणिक काम क्यों नहीं मिला होगा! आज कह सकता हूं कि ऐसा क्यों हुआ होगा। साहित्य और संस्कृति पर पंकज बिष्ट