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कवि का काम

January 25, 2021 admin 0
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आज का भारत लेखक के भीतर एक खौफ पैदा करता है और भारत के भविष्य को लेकर दहशत भरी गहरी दुश्चिंता भी। इस खौफ और दुश्चिंता को आजादी में महसूस किया जा सकता है। यह खौफ हिंदू राष्ट्रवाद का खौफ है, जिसने अश्वमेध के अपने घोड़े को छोड़ दिया है, जो आजादी के बाद के भारत की जितनी भी और जैसी भी सकारात्मक उपलब्धियां थीं, उन सबको रौंदता आगे बढ़ रहा है ।

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सौमित्र चटर्जीः सिनेमा के स्वर्णकाल के महानायक (19 जनवरी, 1935- 15 नवंबर, 2020)

December 23, 2020 admin 0
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सौमित्र चट्टोपाध्याय को भारतीय सिनेमा का महानायक केवल वे सिनेमाप्रेमी ही मानते हैं जो गंभीर, लीक से हटकर, कला और समानांतर सिनेमा के पारखी हैं, और उत्कृष्ट बांग्ला सिनेमा से जिनका परिचय है। बांग्ला सिनेमा में भी मुख्यधारा के लोकप्रिय नायक उत्तम कुमार महानायक माने जाते हैं; और हिंदी सिनेमा में तो अमिताभ बच्चन को सदी के महानायक के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है।

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लोकतांत्रिक नेहरू – जवाहरलाल नेहरू (14 नवंबर 1889-27 मई 1964) की प्रासंगिकता पर

November 14, 2020 admin 0
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प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू (1947 से 1964) के सामने जब आधुनिक लोकतांत्रिक भारतीय राष्ट्र की नींव डालने और उसे पल्लवित-पुष्पित करने का कार्यभार उपस्थित हुआ, तो उनके सामने चुनौतियों के कई पहाड़ थे। इनमें सबसे बड़ी चुनौती जाति विभाजित भारत को एक धर्मनिरपेक्ष आधुनिक लोकतंत्र के रूप में स्थापित करना था। 131वें जन्मदिन पर उनके योगदान का पुनर्संस्मरण।