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क्या स्वास्थ्य हमारे लिए अब भी प्राथमिकता नहीं है?

June 15, 2021 admin 0
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ बहुत पहले से हमारे तबाहहाल स्वास्थ्य ढांचे के प्रति चेतावनी देते आ रहे हैं, लेकिन उनकी सबसे निराशाजनक भविष्यवाणियों में भी इतनी बदतर हालत की कल्पना नहीं की गई थी। इसने हमारे शासकों की हद दर्जे की संवेदनहीनता और खुदगर्जी को तो बेनकाब कर ही दिया है, साथ ही समस्या को कमतर आंकने वाली उनकी शुतुरमुर्गी दृष्टि और खोखले अहंकार को भी चकनाचूर किया है।

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महामारी का विस्फोट

May 25, 2021 admin 0
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महामारी विज्ञान के सारे विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अभी कोरोना के इस दूसरी लहर का सबसे बदत्तर रूप आना बाकी है।  अनुमान है कि इस लहर का सबसे बदत्तर रूप इस माह के मध्य  तक आ सकता है, जब प्रतिदिन कम-से-कम पांच से छह लाख लोग कोरोना के शिकार हो सकते हैं। इसकी पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि कोरोना से घोषित तौर पर संक्रमित लोगों की संख्या में प्रतिदिन हजारों की संख्या में नहीं बल्कि लाखों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जबकि जांच की रफ्तार महामारी के फैलाव की तुलना में काफी धीमी है, दस दिनों के भीतर(18 से 27 अप्रैल) कोरोना संक्रमित घोषित लोगों की संख्या 19,29,329 से बढ़कर 29,78,709 हो गई है यानी दस दिन में 10 लाख से अधिक की वृद्धि।

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युद्ध और विस्थापन की विभीषिका

December 21, 2020 admin 0
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पड़ोसी बांग्लादेश अपनी स्वतंत्रता की आधी सदी अगले वर्ष पूरा करेगा। भारत-पाक युद्ध का पटाक्षेप 16 दिसंबर,1971 को पाकिस्तानी सेना द्वारा आत्मसमर्पण के साथ हुआ था। इसके साथ ही लंबे मुक्ति संघर्ष के पश्चात बांग्लादेश का जन्म हुआ और ‘एक मजहब-एक राष्ट्र या धार्मिक राष्ट्रÓ का मिथक भंग हुआ। वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रामशरण जोशी उन चंद हिंदी पत्रकारों में से हैं जिन्होंने युद्ध क्षेत्र में रहकर सोनारा बांग्लादेश की प्रसव पीड़ा को कवर किया था। प्रस्तुत है उनकी युद्ध क्षेत्र की यादें और अनुभव।

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कांग स्पेल्टी की दुनिया

November 18, 2020 admin 0
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तरुण भारतीय आंख खुलते ही व्हाट्सएप संदेश देखा कि कांग स्पेलिटी नहीं रहीं। वह 28 अक्टूबर की रात 11 बजे चल बसीं। डॉमियासियाट् की महामाता […]

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गांधी और आंबेडकरः राष्ट्र निर्माण की दो विश्व दृष्टियों का संघर्ष

October 16, 2020 admin 2
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डॉ. आंबेडकर और महात्मा गांधी दो भिन्न-भिन्न विचारधाराओं के प्रतिनिधि हैं। वैश्विक संदर्भ में आंबेडकर पाश्चात्य दर्शन (तर्क) के पक्ष में खड़े हैं तो गांधी गैर पाश्चात्य दर्शन (आस्था) के पक्ष में खड़े हैं। भारतीय संदर्भ में आंबेडकर बौद्ध दर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं तो गांधी वैदिक दर्शन का।

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18वीं सदी की राजभक्ति और 21वीं सदी में नजीर?

October 9, 2020 admin 0
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अवमानना के सजा योग्य अपराध होने का इतिहास बताता है कि पहले इंग्लैंड में राजा खुद न्याय करता था। बाद मैं राजा ने न्याय का काम कुछ न्यायाधीशों को अपने प्रतिनिधि के तौर पर सौंपा। तो न्यायाधीशों की निंदा, राजा की निंदा मानी गई और इसलिए दंडनीय हुई। ऐतिहासिक रूप से और जन्म से, अवमानना के अपराध का औचित्य राजा और राज के प्रति जनता के रवैये को प्रभावित करने को लेकर है और न्यायपालिका का खुद को अपमानित महसूस करने का कोई सवाल नहीं है। 

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धर्मनिरपेक्षता पराजित हो गई है?

August 24, 2020 admin 0
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भारतीय जनता पार्टी की विजय का संबंध धर्मनिरपेक्षता के प्रोजेक्ट की जीत-हार से है। धर्मनिरपेक्षता की पराजय के पक्ष में तर्कों का निहितार्थ यही है। धर्मनिरपेक्षता की जय-पराजय के बिंदु को केंद्र में रखकर प्रस्तुत है यह विश्लेषण।