One response to “निरामिषता की हिंसक राजनीति”

  1. dr.dayaram aalok

    भारत में गाय को पवित्र पशु मानने का सिलसिला बहुत प्राचीन नहीं है। विद्वान लेखक ने मनुस्मृति और याग्यवल्क स्मृतियों से पर्याप्त सबूत प्रस्तुत किये हैं।इन धर्मशास्त्रों की मानें तो कोई दो हजार साल पहिले उच्चवर्ण के हिन्दुओं में भी मांस भक्षण बिल्कुल आम था। आज हिंदुओं में गौमांस भक्षण निषेध होने से हालत यह हो गई है कि सभी कस्बों और गांवों में लोगों ने गायों को अवांछित पशु की तरह बेसहारा भूखे मरने के लिये छोड दिया है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। वैसे भी जब भारत गौमांस निर्यातक प्रमुख देश है तो इससे भारत सरकार की गाय के प्रति नीति स्पष्ट दिखाई देती है। कृष्ण सिंहजी का आलेख विचारोत्तेजक है।

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