‘यह जमीं है तुम्हारी, यह जमीं है हमारी’
वूडी गथरी (1912-1967) सही अर्थों में जन गायक थे। किसानों मजदूरों के साथ रहकर ब्लूज संगीत सीखा और आजीवन गरीबों की व्यथा अपने गीतों में कहते रहे। आम लोगों के अधिकारों की लड़ाई, उनकी बदकिस्मती, सामाजिक गैरबराबरी, सरकार की बदइंतजामी, यही मुख्यत: उनके गीतों के सरोकार थे। भारतीय जनांदोलनों में क्रांतिकारी गीतों की जगह महत्त्वपूर्ण [Read the Rest...]
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