जासूसी साहित्य का सामाजिक संदर्भ

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  • नवीन पाठक

ब्रितानवी जासूसी उपन्यासकार जॉन ले कैर (19 अक्टूबर, 1931 – 12 दिसंबर, 2020) का कार्नवॉल इंग्लैंड में निधन। जॉन ल कैर का लेखन अपने विषय और उसकी पृष्ठभूमि की असमान्यता के बावजूद वैश्विक राजनीति की निर्ममता के साथ ही मानवीय कमजोरियों और अच्छाइयों को व्याख्यायित करने का प्रयास है। अपने दो दर्जन से ज्यादा उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने राजनीतिक सत्ताओं की असुरक्षा और महत्त्वाकांक्षाओं के ऐसे खेल को उजागर किया है जो विश्व शक्तियों की उठापटक, हिंसा, षडयंत्र और फरेब के कारनामों को उजागर करते हैं, जिसमें आम नागरिक हिस्सेदारी और शिकार के रूप में इस्तेमाल होता नजर आता है। ले कैर ने अपनी रचनाओं में मारधाड़, सेक्स और सनसनी का घोल प्रस्तुत करने की जगह मानवीय प्रकृति और उसकी कमजोरी को समझने की कोशिश की है। ले कैर के चरित्र भव्य शोहदे और अविजित जासूस नहीं हैं जैसे कि इयान फ्लेमिंग की रचनाओं का जेम्स बांड नाम और 007 नंबर का जासूस है जिसे अभिनेता शीन कोनरी ने फिल्मों के माध्यम से लोकप्रिय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संयोग से कोनरी का देहांत जॉन ले कैर से मात्र डेढ़ महीने पहले हुआ है।

यह अचानक नहीं है कि उनकी तुलना विख्यात अंग्रेजी लेखक ग्राहम ग्रीन से की जाती है। जॉन ले कैर के बारे में उनके एक संपादक ने कहा भी है कि ”उन्हें जासूसी लेखक कहना ऐसा ही है जैसे कि जोसेफ कानरेड को समुद्र का लेखक कहना या जेन आस्टिन को पारिवारिक हास्य व्यंग्य का लेखक कहना।‘’ (जेन आस्टिन 19वीं सदी के प्रारंभ की अंग्रेजी जी महत्त्वपूर्ण लेखिका हैं और कानरेड 20वीं सदी के।)

जॉन ले कैर के छद्मनाम से लिखने वाले डेविड कार्नवैल ने 1959 से 1964 तक एमआई के लिए काम किया। उनका पहला उपन्यास कॉल फॉर डेड 1961 में प्रकाशित हुआ। क्योंकि उस समय वह ब्रिटेन की विदेशों में जासूसी करने वाली संस्था एमआई 6 की सेवा में थे इसलिए उन्हें सलाह दी गई कि वह इसे अपने नाम से न छपवाएं। इस तरह जॉन ले कैर का जन्म हुआ। उनके पहले दो उपन्यासों को नोटिस नहीं लिया गया पर तीसरे उपन्यास स्पाई हू केम इन फ्रॉम कोल्ड ने धूम मचा दी।

1991 में प्रकाशित उपन्यास टिंकर, टेलर, सोल्जर, स्पाई (कसेरा, दर्जी, सिपाही, जासूस) की भूमिका में अपने प्रारंभिक जीवन के संदर्भ में ले कैर ने लिखा है कि ”अगर आप को पसंद हो तो मैं कहना चाहूंगा कि फिल्बी ने एक ऐसा रास्ता अपनाया था जो खतरनाक तरीके से मेरे लिए खुला था, पर मैं उससे बचा। मैं जानता हूं कि वह मेरी प्रकृति की एक ऐसी ही संभावना-भगवान का शुक्रगुजार हूं कि जिसे में हासिल नहीं कर पाया – का प्रतिनिधित्व करता है।‘’

किम फिल्बी दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का ऐसा ब्रितानवी था जो ब्रिटेन और रूस का दोहरा जासूस रहा। जिसने अपने मोहक व्यक्तित्व से ब्रिटिश उच्चवर्गीय समाज में सेंध लगा दी थी और ब्रिटेन के खिलाफ सोवियत रूस के लिए जासूसी की थी। यह मजेदार संयोग है कि वह 1912 में अंबाला में पैदा हुआ था। उसके पिता ब्रितानवी विदेश सेवा में थे। पकड़े जाने से बचने के लिए वह भाग कर सोवियत रूस चला गया, जहां वह अगले 25 साल रहा और वहीं उसका देहांत हुआ। मास्को में उसके नाम का एक चौराहा भी है।

किम फिल्बी के विपरीत ले कैर एक सामान्य परिवार में पैदा हुए थे। उनकी मां, जब वह सिर्फ पांच साल के थे दूसरे आदमी के साथ चली गई थी। असल में ले कैर के पिता ठग किस्म के आदमी थे और उन्होंने जेल की सजा भी काटी थी। इसी प्रतिभा के चलते उन्होंने उच्च वर्ग में भी पैठ बना ली थी। अगर किम फिल्बी को ब्रिटिश उच्च वर्ग से उसके पाखंड के कारण घृणा थी तो ले कैर को इसलिए कि उन्होंने छोटे परिवार से आने का संघर्ष देखा था और इसकी अभिव्यक्ति उनकी रचनाओं में देखी जा सकती है। ले कैर की अपने पिता से टकराहट सदा बनी रही। वह अपनी प्रतिभा से ब्रिटिश विदेशी जासूसी एजेंसी एमआई 6 में पहुंचे थे और योरोप में पूर्व नाजियों को सोवियत रूस के खिलाफ इस्तेमाल करने के काम में नियुक्त रहे।

ले कैर अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सदा उदार रहे। वह अमेरिकी वैश्विक नीतियों के कड़े आलोचक थे। विशेषकर 9/11 के बाद की उसकी नीतियों के बेहद खिलाफ। इराक पर अमेरिकी आक्रमण से कुछ ही दिन पहले उन्होंने इन नीतियों को लेकर लंदन के दैनिक टाइम्स में बहुत ही आक्रामक लेख लिखा था। उसका शीर्षक था ‘संयुक्त राज्य अमेरिका बौरा गया है’।

स्पाई हू केम इन फ्रॉम कोल्ड उनकी रचनाओं पर बनने वाली पहली फिल्म थी जो 1965 में बनी थी। इसी उपन्यास में उन्होंने लिखा है: ”आप को क्या लगता है जासूस क्या होते हैं : पुजारी, संत और शहीद? वे दिखावा करने वाले बेवकूफों, जी हां, देशद्रोहियों का भी, कुत्सित जलूस हैं; विकृत, व्यभिचारी, परपीड़क और शराबी, ऐसे लोग जो अपनी सड़ी-गली जिंदगी को चमकाने के लिए काउ बॉय और (रेड) इंडियन का खेल खेलते हैं।‘’

ले कैर के उपन्यासों पर लगभग सात फिल्में बनी हैं। उन्होंने कुल मिलाकर 25 उपन्यास लिखे हैं जो सभी जासूसी पृष्ठभूमि पर हैं और जिनकी विषय वस्तु वे मानवीय स्थितियां और द्वंद्व हैं जो राजनीति या सत्ता द्वारा पैदा किए जाते हैं और जिनके जाल में प्रतिभाशाली लोग जान जोखिम में डाल ऐसे कामों को अंजाम देते हैं जो नैतिकता और अनैतिकता की सीमा से बाहर घटते हैं।

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