‘जब मैंने यह दृश्य देखा तो मेरा दिल बिखर गया’

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मेरिल स्ट्रीप
अमेरिकी लोकतंत्र की बहुआयामिकता, अमेरिकी समाज में तमाम जकड़बंदियों के बावजूद एक निरंतर खुले स्पेस के लिए व्याकुलता और वहां के सार्वजनिक जीवन में साहस और समझ की मिसालें मिलती रही हैं। हाल के दशकों में नॉम चॉमस्की, ऑक्यूपाई वॉल स्ट्रीट आंदोलन, बर्नी सैंडर्स, माइकल मूर, रॉबर्ट राइच, ऐमी गुडमैन से लेकर सैकड़ों नाम हैं, सार्वनजिक बुद्धिजीवियों, लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों, एक्टिविस्टों, कवियों, राजनीतिज्ञों, वैज्ञानिकों और इतिहासकारों और अभिनय जगत की शख्सियतों की एक भरीपूरी बिरादरी है और पीढिय़ों की एक समृद्ध परंपरा है जो अमेरिका जैसी भूमंडलीय सत्ता संरचना के विराट अंधकार के समक्ष प्रतिरोध का प्रकाश बनाए रखने में अपनी भरपूर सामथ्र्य के साथ अपने-अपने वक्तों में खड़ी रहती आई है।
हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मेरिल स्ट्रीप, इसकी एक सबसे ताजा मिसाल हैं जिन्होंने अपने भाषण में बगैर नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने जा रहे डोनाल्ड ट्रम्प के रवैए की भत्र्सना की और संघर्ष का आह्वान भी किया। तीन से चार मिनट के इस भाषण को, जो करीब साढ़े छह मिनट जोरदार तालियों और स्वागत के साथ पूरा हुआ, देखना और सुनना एक विरल अनुभव है। हाल के दिनों में एक बहुत गहरी प्यास और संताप से घिरे एक सच्चे भारतीय मन की जैसे एक मुराद पूरी होती है। उसका ही दुख जैसे कई महासागरों के पार कोई कह रहा है। मेरिल स्ट्रीप बेशक एक अनुभवी अदाकारा हैं लेकिन यह भाषण उनकी वेदना की एक परम अभिव्यक्ति था। वाह एक बहुत सच्ची और पुरजोर, बहुत व्याकुल और थर्राती हुई और कांपती हुई आवाज में बोलीं। लेकिन उस आवाज में अंतत: मनुष्य गरिमा के लिए सम्मान था और उस गरिमा की हिफाजत की अटूट जिद जैसी। काश, एक गहरी उसांस वाला काश कि हमारे देश में अभिनय जगत के वे नाना रोशनियों और दौलतों और सत्ताओं में डूबे हुए एक से एक सितारे महासितारे दुलारे महानायक राजे महाराजे शहंशाह बादशाह आदि- इतने सच्चे, इतने खरे और इतने साहसी हो पाते।
पेश है मेरिल स्ट्रीप के यह भाषण जो उन्होंने इस वर्ष गोल्डन ग्लोब फिल्म समारोह में :

आप सबको मेरा प्यार। आप लोग मुझे
माफ करेंगे, दरअसल इस वीकेंड चीख-चीख कर और मातम में मेरी आवाज गुम हो गई है और इसी साल की शुरुआत में कोई वक्त था जब मेरा दिमाग भी फिर गया। लिहाजा मैं (अपना भाषण) पढ़ूंगी। (हालांकि मेरिल स्ट्रीप ने पढ़ा नहीं वो धाराप्रवाह बोलती रहीं)
शुक्रिया, हॉलीवुड फॉरेन प्रेस। अभी जैसा कि ह्यू लॉरी* ने कहा, उसी से अपनी बात उठाते हुए कहूंगी कि इस कक्ष मंष उपस्थित आप और हम सब ठीक इस समय अमेरिकी समाज के सबसे ज्यादा तिरस्कृत लोग कहलाए जा रहे हैं। जरा इस पर ध्यान दीजिए: एक तो हॉलीवुड, दूसरा विदेशी और तीसरा प्रेस।
लेकिन हम कौन हैं और आप जानते ही हैं कि आखिर हॉलीवुड क्या है। ये दूसरी जगहों से आए लोगों का महज एक झुंड है। मैं न्यू जर्सी में पैदा हुई, वहीं पली-बढ़ी और वहां के पब्लिक स्कूलों में शिक्षित हुई, वायोला साउथ केरोलिना में एक छोटे से किसान की गुमटी में पैदा हुई, सेंट्रल फॉल्स पहुंची, आर.आई. सराह पॉल्सन फ्लोरिडा में पैदा हुई थी, ब्रूकलिन में उन्हें सिंगल मां ने पालपोस कर बड़ा किया। ओहियो की रहने वाली सारा जेसिका पार्क सात या आठ भाई बहनों में एक थी। ऐमी एडम्स विसेन्जा में, वेनेतो इटली में और नैटली पोर्टमैन यरूशेलम में पैदा हुई थी। इन सबके जन्म प्रमाणपत्र कहां हैं?
और खूबसूरत रूथ नेगा इथोपिया के अदीस अबाबा में पैदा हुई थी, लंदन में….ओह नहीं…आयरलैंड में पलीं बढ़ीं, और यहां वो वर्जीनिया की एक छोटे से कस्बे की लड़की की भूमिका में अपने अभिनय के लिए नामांकित की गई हैं। रयान गोसलिंग, सबसे सुंदर लोगों की तरह, कैनडियन हैं। और देव पटेलवास केन्या में पैदा हुए थे, लंदन में पले बढ़े और यहां टैस्मानिया में पलेबढ़े भारतीय का किरदार निभा रहे हैं। इस तरह, हॉलीवुड बाहरी लोगों और विदेशियों के सामने रेंग रहा है और अगर हम इन सबको मारकर भगा दें तो फुटबॉल और मिक्स्ड मार्शल करतबों के सिवाय आपके पास देखने को कुछ भी नहीं बचेगा… और ये कलाएं तो हैं नहीं।
एक अभिनेता का एक ही काम होता है और वो है उन लोगों की जिंदगियों में दाखिल हो जाना जो हमसे अलग हैं और आपको वैसा हो जाने का अहसास कराते हैं। और इस साल इस तरह के बहुत-बहुत सारे मजबूत अभिनय पेश किए गए थे। इन अदाकारों ने ये मुमकिन कर दिखाया, विस्मय और करुणा से सराबोर अभिनय थे ये।
लेकिन इस साल एक ऐसा अभिनय भी देखने को मिला जिससे मैं स्तब्ध रह गई। उसका कांटा मेरे दिल में जा डूबा, इसलिए नहीं कि वो अच्छा था- इसलिए कि… क्या कहूं.. वो किसी भी लिहाज से तो अच्छा नहीं था। लेकिन वो असरदार था और अपना काम कर गुजरा। वो अपने अभीष्ट ऑडियंस को अट्टहास कराने और उनकी बत्तीसी दिखा सकने में सफल रहा।
ठीक यही मौका था जब हमारे देश की सबसे सम्मानित कुर्सी पर बैठने की मांग करने वाले व्यक्ति ने एक अपाहिज रिपोर्टर की नकल उतारी, एक ऐसे इंसान की नकल उतारी जो विशेषाधिकार में, सत्ता में और मुकाबला करने की क्षमता के मामले में उसके दूर-दूर तक कहीं नहीं फटकता था। मैंने जब ये दृश्य देखा तो मेरा दिल एक तरह से बिखर गया। और मैं अभी तक अपने जेहन से इसे निकाल नहीं पाई हूं क्योंकि ये एक फिल्म का दृश्य नहीं था। यह एक वास्तविक जीवन था। अपमानित करने की इस प्रवृत्ति का इजहार सार्वजनिक मंच से कोई शक्तिशाली व्यक्ति करता है तो यह हर किसी के जीवन तक उतर आती है क्योंकि लोगों को इसी तरह पेश आने की छूट मिल जाती है।
बेकद्री, बुलावा देती है बेकद्री को। हिंसा, हिंसा को ही उकसाती है। जब शक्तिशाली लोग अपनी पोजीशन का इस्तेमाल दूसरो को धौंस दिखाने के लिए करते हैं तो हम सब हारते हैं। ठीक है, यही ठीक है, ऐसा ही चलता रहने दो… यह हो जाता है। चलिए, यह बात अब मुझे प्रेस तक ले आती है। हमें एक सिद्धांत वाले प्रेस की दरकार है जो सत्ता से हिसाब मांग सके, हर उन्माद के लिए सत्ताधारियों से जवाब-तलब कर सके, उन्हें फटकार लगा सके।
इसीलिए हमारे संस्थापकों ने हमारे संविधान में प्रेस और उसकी आजादियों को एक खास जगह दी थी। तो अपनी दौलतमंदी के लिए मशहूर हॉलीवुड फॉरेन प्रेस से और अपनी बिरादरी के हम सभी लोगों से मैं इतना ही कहूंगी कि ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्सÓ के समर्थन में मेरा साथ दें। क्योंकि आगे बढ़ते रहने के लिए हमें उनकी जरूरत है और सच्चाई की हिफाजत के लिए उन्हें हमारी जरूरत है।
एक बात और। एक बार मैं अपनी फिल्म के सेट पर खड़ी थी, किसी चीज के बारे में शिकायत करती हुई, कि हमारा काम लंबा खिंच रहा था, रात के खाने तक या बहुत ज्यादा घंटे जा रहे थे या ऐसी ही कोई बात थी। उस समय टॉमी ली ने मुझसे कहा, ”मेरिल क्या अभिनेता होना अपने आप में एक प्रिवलिज जैसा नहीं है?ÓÓ हां, बिल्कुल है। और हमें एक दूसरे को इस विशेषाधिकार और हमदर्द बने रहने की जिम्मेदारी की याद दिलाते रहना चाहिए। हमें उस काम पर गर्व करना चाहिए जिसे आज रात हॉलीवुड यहां सम्मानित कर रहा है। मेरी प्रिय दोस्त और अब दिवंगत प्रिसेंस लीया ने एक बार मुझसे कहा था, ”अपना टूटा हुआ दिल ले जाओ और इसे कला में बदल दो।‘’
फॉरेन प्रेस, आपका शुक्रिया। 
(मूल अंग्रेजी से अनूदित, टेलीग्राफ के ऑनलाइन संस्करण से साभार)
http://www.telegraph.co.uk/films/
2017/01/09/meryl-streeps-goldenglobes-
speech-full-transcriptdisrespect/
*ह्यू लॉरी: ब्रिटिश अभिनेता, कॉमेडियन और लेखक। गोल्डन ग्लोब अवार्ड समारोह में उन्होंने अपने हास्य और ट्रंप के इर्दगिर्द बुने अद्भुत हास्य से सबको रोमाचिंत कर दिया।ठ्ठ
प्रस्तुति: शिवप्रसाद जोशी

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